
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,उत्तराखंड सरकार,देहरादून। विषय: उत्तराखंड में ‘विधान परिषद’ के गठन एवं उसमें शिक्षक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु मांग पत्र।महोदय,सादर अवगत कराना है कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण का मुख्य उद्देश्य विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस पर्वतीय प्रदेश का समग्र विकास और अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज को शासन तक पहुँचाना था। राज्य के विकास में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, किंतु वर्तमान में प्रदेश के शिक्षक विभिन्न प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं से निरंतर जूझ रहे हैं।उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्य की व्यवस्था का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि वहां ‘द्विसदनीय विधायिका’ (विधान परिषद) की व्यवस्था अत्यंत प्रभावी है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शिक्षकों के लिए सुरक्षित सीटें (शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) होने के कारण वहां शिक्षकों की समस्याओं को सदन में मजबूती से रखा जाता है और उनका त्वरित समाधान भी सुनिश्चित होता है।अतः, राज्य के समस्त शिक्षक समुदाय की ओर से हम आपसे निम्नलिखित मांगें रखते हैं:विधान परिषद का गठन: उत्तराखंड में लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने तथा नीति-निर्माण में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु ‘विधान परिषद’ (Upper House) के गठन की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए।शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: प्रस्तावित विधान परिषद में उत्तर प्रदेश की भांति ‘शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र’ का प्रावधान किया जाए, जिससे निर्वाचित शिक्षक प्रतिनिधि समय-समय पर सदन में शिक्षकों की शैक्षिक, आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं को सीधे सरकार के समक्ष रख सकें।नीतिगत भागीदारी: शिक्षकों का एक समर्पित प्रतिनिधि होने से राज्य की शिक्षा नीति को अधिक व्यवहारिक और प्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।महोदय, उत्तराखंड का शिक्षक समाज राज्य निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक सदैव अग्रणी रहा है। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप शिक्षकों के हितों और लोकतांत्रिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस महत्वपूर्ण मांग पर सकारात्मक विचार करेंगे।सादर धन्यवाद।भवदीय,(सुभाष चौहान)महामंत्री अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
