कलयुग में संस्कार और संस्कृति का अमृत है श्रीमद्भागवत कथा : कथा व्यास सुभाष जोशी

9 मई 2026, देहरादून

कलयुग में संस्कार और संस्कृति का अमृत है श्रीमद्भागवत कथा : कथा व्यास सुभाष जोशी

देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित विकास लोक, लेन नंबर-3 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत आज कथा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम वातावरण देखने को मिला। सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित सुभाष जोशी ने कहा कि कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि युवाओं में संस्कार, नैतिकता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सशक्त माध्यम है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति पर पाश्चात्य प्रभाव का गहरा असर दिखाई दे रहा है। ऐसे दौर में श्रीमद्भागवत जैसे दिव्य ग्रंथ समाज को धर्म, कर्तव्य, मातृशक्ति के सम्मान, प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, जल संरक्षण और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देते हैं। जब-जब अधर्म बढ़ता है और समाज संकट में पड़ता है, तब-तब भगवान श्रीकृष्ण धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेते हैं।आज की कथा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध, रुक्मिणी विवाह, द्वारका निर्माण तथा कृष्ण-सुदामा मिलन के अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायी प्रसंगों का संगीतमय वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल “राधे-राधे” एवं “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।कथा के समापन पर पधारे अतिथियों का व्यास पीठ से सम्मान किया गया। क्षेत्रवासियों ने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भक्तिभाव से रसपान किया।इस अवसर पर श्रीमती आशा जायसवाल एवं श्री अनिल कुमार जायसवाल, श्रीमती पूजा जायसवाल एवं श्री मनोज कुमार जायसवाल, श्रीमती पूजा जायसवाल एवं श्री मनीष कुमार जायसवाल, श्रीमती श्रद्धा जायसवाल एवं श्री आशीष कुमार जायसवाल, सिद्धांत, अभिनव, आर्यन, अनुरुद्ध, यथार्थ, अनुष्का एवं वैभव कुमार जायसवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।कार्यक्रम में श्री महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा, विनय प्रजापति, हिमांशु कोटनाला एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने भाग लेकर कथा आयोजन को सफल बनाया तथा अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया।

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