
✨क्या है पंचक ✨
पंचक को वह समय माना जाता है, जिसमें किसी भी तरह के मांगलिक कार्य जैसे शादी, लग्न, ग्रह प्रवेश, नामकरण, सगाई आदि नहीं किए जाते हैं। हालांकि कुछ पंचक में शुभ कार्य किए जा सकते हैं जैसे राज पंचक को अच्छा माना जाता है। चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को ‘पंचक’ कहते हैं। हर महीने में 27 दिनों के अंतराल पर पंचक नक्षत्र का चक्र बनता रहता है। चंद्रमा 27 दिनों में सभी नक्षत्रों का भोग कर लेता है, एक राशि में चंद्रमा ढाई दिन और दो राशियों में चंद्रमा पांच दिन रहता है। इन पांच दिनों के दौरान चंद्रमा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। इस कारण ये पांचों दिन पंचक कहलाते हैं।
पंचक क्या होता है ?
ज्योतिष में पंचक को शुभ नहीं माना जाता है। इसे अशुभ नक्षत्रों का योग मानते हैं। नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहते हैं। जब चन्द्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है, तब उस समय को पंचक कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को अशुभ माना गया है। पंचक कितने प्रकार का होता है और इसमें कौन-कौन से काम नहीं करने चाहिए। पंचक के दौरान कुछ विशेष काम करने की मनाही है। इसके अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समय-समय पर ग्रहों और नक्षत्रों की चाल की गणना के आधार पर किसी मांगलिक कार्य को करने के लिए समय निर्धारित किया जाता है। इसी को शुभ और अशुभ मुहूर्त कहा जाता है। शुभ मुहूर्त में कार्य करने पर उस काम में सफलता की प्राप्ति होती है, जबकि अशुभ मुहूर्त में किया गया कार्य में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न होती है। जब कभी अशुभ नक्षत्र का योग बनता है तब इस योग को पंचक कहा जाता है। ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है।
पंचक कब लगता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहा जाता है। इन पांच नक्षत्रों में घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती हैं। पंचक का स्वामी ग्रह कुंभ और राशि मीन होती है। प्रत्येक माह आने वाले पंचक में इन पांच नक्षत्रों की भी गणना की जाती है। घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती ये नक्षत्र पर जब चन्द्रमा गोचर करते हैं तो उस काल को पंचक काल कहा जाता है। पंचक निर्माण तभी होता है जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि पर गोचर करते हैं।
पंचक के प्रकार
रोग पंचक –
रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।
राज पंचक –
सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।
अग्नि पंचक –
मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में अग्नि का भय होता है। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है। इनसे नुकसान हो सकता है।
मृत्यु पंचक –
शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।
चोर पंचक –
शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। विद्वानों के अनुसार, इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है।
बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।
पंचक में वर्जित 5 मुख्य कार्य –
दक्षिण दिशा की यात्रा : दक्षिण दिशा यम और पितरों की मानी जाती है, इसलिए इस दिशा में यात्रा हानिकारक मानी जाती है.
घर की छत डालना : इससे घर में कलह और धन हानि हो सकती है.
लकड़ी/घास इकट्ठा करना या फर्नीचर बनवाना : खाट, बिस्तर, या लकड़ी का कोई भी सामान इकट्ठा करना या बनाना अशुभ माना जाता है, जिससे संकट आ सकता है.
नया निर्माण कार्य (अग्नि पंचक में) : यदि पंचक मंगलवार से शुरू हो (अग्नि पंचक), तो निर्माण कार्य, मशीनरी से जुड़े काम और नए घर में प्रवेश से बचना चाहिए.
शुभ कार्य (कुछ मान्यताओं के अनुसार) : विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इनसे धन हानि और क्लेश हो सकता है.
अन्य वर्जित कार्य –
सोना, चांदी, या नया वाहन खरीदना (विशेषकर अग्नि पंचक में).
जमीन खरीदना या रजिस्ट्री करवाना (विशेषकर शनि या मंगलवार को शुरू होने पर).
पंचक में क्या करें (और क्या नहीं) –
क्या न करें : दक्षिण यात्रा, छत डालना, लकड़ी इकट्ठा करना, नया निर्माण, सोना-चांदी खरीदना, विवाह, गृह प्रवेश, बाल कटवाना, नाखून काटना.
क्या करें (यदि जरूरी हो) : यदि कोई कार्य आवश्यक हो, तो उसके दोष निवारण के उपाय किए जा सकते हैं, जैसे हनुमान जी की पूजा, आटे का पंचमुखी दीपक जलाना, या मिठाई खिलाना. रेवती नक्षत्र में कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए.
वर्ष 2026 के पंचक के दिन और समय
पंचक आरम्भ
21 जनवरी 2026, बुधवार को प्रातः 01:35 बजे से
पंचक अंत
25 जनवरी 2026, रविवार को दोप. 01:35 बजे तक
पंचक आरम्भ
17 फरवरी 2026, मंगलवार को प्रातः 09:05 बजे से
पंचक अंत
21 फरवरी 2026, शनिवार को रात्रि 07:07 बजे तक
पंचक आरम्भ
16 मार्च 2026, सोमवार को रात्रि 06:14 बजे से
पंचक अंत
21 मार्च 2026, शनिवार को रात्रि 02:27 बजे तक
पंचक आरम्भ
13 अप्रैल 2026, सोमवार को रात्रि 03:44 बजे से
पंचक अंत
17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को दोप. 12:02 बजे तक
पंचक आरम्भ
10 मई 2026, रविवार को दोप. 12:12 बजे से
पंचक अंत
14 मई 2026, बृहस्पतिवार को रात्रि 10:34 बजे तक
पंचक आरम्भ
06 जून 2026, शनिवार को रात्रि 07:03 बजे से
पंचक अंत
11 जून 2026, बृहस्पतिवार को प्रातः 08:16 बजे तक
पंचक आरम्भ
04 जुलाई 2026, शनिवार को रात्रि 12:48 बजे से
पंचक अंत
08 जुलाई 2026, बुधवार को दोप. 04:00 बजे तक
पंचक आरम्भ
31 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रातः 06:38 बजे से
पंचक अंत
04 अगस्त 2026, मंगलवार को रात्रि 09:54 बजे तक
पंचक आरम्भ
27 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार को दोप. 01:35 बजे से
पंचक अंत
01 सितम्बर 2026, मंगलवार को रात्रि 03:23 बजे तक
पंचक आरम्भ
23 सितम्बर 2026, बुधवार को रात्रि 09:57 बजे से
पंचक अंत
28 सितम्बर 2026, सोमवार को प्रातः 10:16 बजे तक
पंचक आरम्भ
21 अक्टूबर 2026, बुधवार को प्रातः 07:00 बजे से
पंचक अंत
25 अक्टूबर 2026, रविवार को रात्रि 07:22 बजे तक
पंचक आरम्भ
17 नवम्बर 2026, मंगलवार को दोप. 03:30 बजे से
पंचक अंत
22 नवम्बर 2026, रविवार को प्रातः 05:54 बजे तक
पंचक आरम्भ
14 दिसम्बर 2026, सोमवार को रात्रि 10:35 बजे से
पंचक अंत
19 दिसम्बर 2026, शनिवार को दोप. 03:58 बजे तक
