दशलक्षण महापर्व के छठवां दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना,सुगंध दशमी (धूप दशमी) कार्यक्रम आयोजित*

*दशलक्षण महापर्व के छठवां दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना,सुगंध दशमी (धूप दशमी) कार्यक्रम आयोजित*

दशलक्षण महापर्व के छठवां दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना,सुगंध दशमी (धूप दशमी) कार्यक्रम आयोजित*

आत्मबोध संस्कार शिविर में श्रद्धालुओं ने उठाया धर्मलाभदेहरादून। पर्वाधिराज पर्युषण दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व भव्य एवं धार्मिक वातावरण में मनाया जा रहा है।प्रातःकाल मंदिरों में घंटियों की मधुर गूंज के बीच श्रीजी का प्रक्षाल, नित्य नियम पूजन एवं दशलक्षण पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके साथ ही आयोजित भव्य आत्मबोध संस्कार शिविर में देहरादून के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं।इस अवसर पर पूज्य आर्यिका पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उत्तम संयम धर्म जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व (पर्यूषण पर्व) का छठा दिन है, जो मन, वचन और काया पर नियंत्रण तथा आत्म-संयम का संदेश देता है।संयम का अर्थसम + यम: ‘सम’ यानी भली-भांति और ‘यम’ यानी नियंत्रण करना। आत्मा को विकारों से बचाना ही संयम है।इंद्रिय संयम: स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण (पाँचों इंद्रियों) और मन की लालसा या विषयों पर नियंत्रण रखना।प्राणी संयम: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति (स्थावर) और त्रस जीवों की रक्षा करना, किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाना।महत्व संयम के बिना जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी या बिना लगाम के घोड़े के समान है, जो पतन और दुर्घटना की ओर ले जाता है।यह उत्तम संयम धर्म व्यक्ति को आत्मिक शांति, पवित्रता और निर्भयता की ओर अग्रसर करता है।आज *सुगंध दशमी* के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा धूप खेवन सुगंध दशमी पर्व भी मनाया गया ।धूप खेना इस दिन जैन धर्मावलंबी जिनालयों (मंदिरों) में जाकर भगवान के सामने चंदन, कपूर, अगर-तगर आदि की सुगंधित धूप अर्पित (खेते) हैं।वातावरण की पवित्रता धूप की सुगंध से पूरा वातावरण महक उठता है और शुद्ध हो जाता है।कर्मों की निर्जरा होती हैं धार्मिक मान्यता के अनुसार, जैसे धूप जलकर अपनी सुगंध फैलाती है, वैसे ही भक्तों को अपने पापों और कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) को जलाकर अपने भीतर पवित्रता और सदाचरण की सुगंध फैलानी चाहिए।आज दोपहर 2:00 बजे क्लेमेनटाउन मंदिर द्वारा प्रेरणादायक नाटिका का मंचन किया गया।आत्मबोध संस्कार शिविर के अंतर्गत आचार्य भक्ति, सामायिक, शंका समाधान, प्रतिक्रमण, जैन धर्म पर मार्मिक प्रवचन, तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन, महाआरती, दस धर्मों पर प्रवचन, ‘द आर्ट ऑफ सेल्फ-डिस्कवरी’ ध्यान शिविर तथा प्रश्न मंच सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ध्यान शिविर में बा.ब्र. ऋतु दीदीजी ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन एवं आत्म-अन्वेषण के लिए प्रेरित किया।*कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन* ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया *कि 22 सितम्बर 2 बजे मंगलाचरण जैन मिलन राजुल रात्रि 8:30 बजे नाटिका दान का महत्व जैन मिलन राजू द्वारा दोपहर 1:00 बजे स्वर्गीय सुशील चंद्र जैन स्मृति वाद विवाद प्रतियोगिता श्री महावीर जैन कन्या पाठशाला तिलक रोड पर प्रांगण में आयोजित की जाएगी।इस अवसर पर जैन समाज, श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, जैन भवन कार्यकारिणी सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में बाहर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी के पावन सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त किया।मधु जैनमीडिया कोऑर्डिनेटरजैन समाज

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