उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम् हरिद्वार द्वारा आयोजित षोडश संस्कार : प्रयोगात्मक प्रशिक्षण कार्यशाला जैन धर्मशाला प्रिंस चौक में विधिवत दीप प्रज्वलित वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रारंभ हो गई यह प्रशिक्षण पांच दिनों तक चलेगी ।

इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आम जनमानस के जीवन में अच्छे संस्कारों के महत्व से अवगत कराना तथा उन्हें व्यवहारिक रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। मुख्य अतिथि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष श्री विजय कुमार बिष्ट ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं और एक सशक्त समाज की नींव रखते हैं। उन्होंने बताया कि आज के समय में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का विकास अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न प्रयोगात्मक गतिविधियों, संवाद, समूह चर्चा तथा अभ्यासों के माध्यम से यह बताया गया कि किस प्रकार दैनिक जीवन में छोटे-छोटे व्यवहार से उत्तम संस्कार विकसित किए जा सकते हैं। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अनेक प्रश्न पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए।
डॉ गीता खन्ना (अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग ) एवं मुख्य वक्ता डॉ मोहन लाल जोशी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करने में अत्यंत सहायक होती हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया । इस अवसर पर पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रोफेसर मनोज किशोर पंत कार्यक्रम के संयोजक सुभाष जोशी मनोज शर्मा संस्कृत शिक्षा परीक्षा परिषद की सचिव पद्माकर मिश्र डॉ रामभूषण बिजल्वाण डॉ शैलेंद्र डंगवाल डॉ सीमा बिजल्वाण शिवसेना प्रमुख गौरव डॉ नवीन सिंघल किशोरी लाल रतूड़ी अनूप बहुखंडी डॉ दीपशिखा कविता मैठाणी आदि अनेक प्रशिक्षणार्थी एवं श्री महाकाल सेवा समितिके अध्यक्ष रोशन राणा व विनय प्रजापति, गौरव जैन, बालकृष्ण शर्मा, संजीव गुप्ता उपस्थित थे
