हर हर महादेव महाशिरात्रि पर विशेष 🙏🏻🔱🌿🕉️🚩

महाशिवरात्रि
एक रोचक कथा के बारे में______सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन महादेव के विशालकाय स्वरूप एक अग्निलिंग के उदय से सृष्टि आरंभ हुई। कई लोग यह मान्यता भी रखते हैं कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवि पार्वती के साथ हुआ था। हर साल पड़ने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। कश्मीर में शैव मत को मानने वाले इस त्यौहार को हर-रात्रि और ‘हेराथ’ या ‘हेरथ’ के रूप में मनाते हैं। इस दिन को शिव सती के मिलन के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर शिव आराधना और अभिषेक उत्तम फलदाई माना जाता है। शिवरात्रि पर अभिषेक करने का बहुत महत्व है, ऐसा करके भक्तजन अपने जीवन में धन लक्ष्मी की स्थिरता, बीमारी से निजात, संतान सुख और कष्‍टों से छुटकारा पाने के लिए अभिषेक करते हैं। शुद्ध जल, गुड़ युक्त जल, तीर्थ स्थलों की नदियों के जल, गन्ने के रस, विभिन्न पुष्पों के रस और दही-दूध आद‍ि से भोलेनाथ का अभिषेक करके उनका आशिर्वाद प्राप्‍त किया जा सकता है। इस व्रत के महातम्‍य से जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा भी है जो स्‍वंय शिव जी ने माता पार्वती को सुनाई थी।

इस कथा के अनुसार एक बार पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर सकते हैं?’ उत्तर में भोलेनाथ ने शिवरात्रि के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई। इसके अनुसार एक बार चित्रभानु नामक एक शिकारी था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन ऋण समय पर न चुका सकने पर क्रोधित साहूकार ने उसको शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। बंदी रहते हुए शिकारी मठ में शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा, वहीं उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी। संध्या होने पर साहूकार ने उसे बुलाया और ऋण चुकाने के लिए पूछा तो शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन दिया। साहुकार ने उसकी बात मान ली और उसे छोड़ दिया। अगले दिन शिकारी जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए गया और एक तालाब के किनारे बेल-वृक्ष पर मचान बनाने लगा। उस बेल वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो विल्वपत्रों से ढका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला। भूख और प्‍यास से थका वो उसी मचान पर बैठ गया।

मचान बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरीं। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुंची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, ‘मैं गर्भिणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब मार लेना।’ शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई। कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, क‍ि मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी धनुष पर तीर चढ़ा कर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो। शिकारी हंसा और बोला, सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे। उत्तर में मृगी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी इनकी फिक्र है इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान मांग रही हूं। मेरा विश्वास करो, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं। मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में बेल-वृक्षपर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हृष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृगविनीत स्वर में बोला, भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा।
मृग की बात सुन कर शिकारी ने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, वे मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं। उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। उसके हाथ से धनुष तथा बाण छूट गया और उसने मृग को जाने दिया। थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आंसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया। देवलोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहे थे। उन्‍होंने इस शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष का वरदान दिया।

श्री महाशिवरात्रि व्रत पूजन विधि______शिवरात्रि’ भगवान शिव और माँ पार्वती के मिलन का महापर्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने में मनाया जाने वाला यह पर्व हिन्दू धर्म में काफ़ी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है की गंगा स्नान कर भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तो और साधकों को इच्छित फल, धन, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। हिन्दुओं द्वारा पूरी साधना से मनाया जाने वाला यह महापर्व शिव जी की शादी के लिए प्रसिद्ध है।
महाशिवरात्रि व्रत का सबसे प्रमुख भाग इसका उपवास है। इस दिन शिव भगवान के भक्तों का जमावड़ा शिव मंदिर में लगता है जहाँ सरे भक्तजन शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करते हैं और रात्रि में शिव जी की आरती का जागरण करते हैं। भक्तगणों द्वारा शिवलिंग पूजा में बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास और रात्रि जागरण करना अनिवार्य है। इसी दिन रात्रि में भक्तों द्वारा भगवान शिव की बारात निकली जाती है ऐसा माना जाता है कि इसी दिन शिव जी और माँ शक्ति की शादी हुई थी। इस दिन केवल एक समय का भोजन अर्थात फल का सेवन कर सकते है। कई सारे भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते है। महाशिवरात्रि को रात्रि जागरण करने वाले भक्तों को मन्त्र उच्चारण, शिव आरती अथवा शिव आराधना करना चाहिए।________शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी तिथि में शिवजी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके उपरांत चतुर्दशी तिथि को निराहार रहना चाहिए। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को गंगा जल चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर ‘ॐ नमः शिवायः’ मंत्र से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए और अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।
व्रत का विधान –
नित्य नैमित्यक क्रिया शौचादि से निवृत्ति के वाद व्रत का संकल्प,पूजन हवन, शिव अभिषेक नमक-चमक से, ब्रह्मचर्य का पालन, अक्रोध, श्रद्धा भक्ति।
पूजा सामग्री –
सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भाँग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, पंच फल पंच मेवा, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, शिव व माँ पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, वस्त्राभूषण रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुश-आसन आदि।
व्रत व पूजा के मंत्र –
ॐ नमः शिवाय का जाप या मनन श्रद्धा व ध्यान से।

श्री महाशिवरात्रि व्रत_______शास्त्र कहते हैं कि संसार में अनेकानेक प्रकार के व्रत, विविध तीर्थस्नान नाना प्रकारेण दान अनेक प्रकार के यज्ञ तरह-तरह के तप तथा जप आदि भी महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकते। अतः अपने हित साधनार्थ सभी को इस व्रत का अवश्य पालन करना चाहिए।_______महाशिवरात्रि व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है। इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह शिव रात्रि व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है एवं चारों पुरूषार्थो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है। हो सके तो इस व्रत को जीवन पर्यंत करें नही तो चैदह वर्ष के बाद पूर्ण विधि विधान के साथ उद्यापन कर दें।
व्रतराज के सिद्धांत और पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शिवरात्रि के व्रत के बारे में भिन्न-भिन्न मत हैं, परन्तु सर्वसाधारण मान्यता के अनुसार जब प्रदोष काल रात्रि का आरंभ एवं निशीथ काल (अर्द्धरात्रि) के समय चतुर्दशी तिथि रहे उसी दिन शिवरात्रि का व्रत होता है।
समर्थजनों को यह व्रत प्रातः काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त तक करना चाहिए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस विधि से किए गए व्रत से जागरण पूजा उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है और भगवान शिव की विशेष अनुकम्पा प्राप्त होती है।
इससे व्यक्ति जन्मांतर के पापों से मुक्त होता है। इस लोक में सुख भोगकर व्यक्ति अन्त में शिव सायुज्य को प्राप्त करता है। जीवन पर्यन्त इस विधि से श्रद्धा विश्वास पूर्वक व्रत का आचरण करने से भगवान शिव की कृपा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जो लोक इस विधि से व्रत करने में असमर्थ हों वे रात्रि के आरंभ में तथा अर्द्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं।
यदि इस विधि से भी व्रत करने में असमर्थ हों तो पूरे दिन व्रत करके सांयकाल में भगवान शंकर की यथाशक्ति पूजा अर्चना करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। इस विधि से व्रत करने से भी भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। शिवरात्रि में संपूर्ण रात्रि जागरण करने से महापुण्य फल की प्राप्ति होती है। गृहस्थ जनों के अलावा सन्यासी लोगों के लिए महारात्रि की साधना एवं गुरूमंत्र दीक्षा आदि के लिए विशेष सिद्धिदायक मुहूर्त होता है।
अपनी गुरू परम्परा के अनुसार सन्यासी जन महारात्रि में साधना करते हैं। महाशिवरात्रि की रात्रि महा सिद्धिदात्री होती है। इस समय में किए गए दान पुण्य शिवलिंग की पूजा स्थापना का विशेष फल प्राप्त होता है। इस सिद्ध मुहूर्त में पारद अथवा स्फटिक शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के बाद अपने घर में अथवा व्यवसाय स्थल या कार्यालय में स्थापित करने से घर परिवार व्यवसाय और नौकरी में भगवान शिव की कृपा से विशेष उन्नति एवं लाभ की प्राप्ति होती है। परमदयालु भगवान शंकर प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। अटके हुए मंगल कार्य सम्पन्न होते है….कन्याओं की विवाह बाधा दूर होती है।

श्री महाशिवरात्रि व्रत राशि अनुसार उपाय_____शास्त्र कहते हैं कि संसार में अनेकानेक प्रकार के व्रत, विविध तीर्थस्नान नाना प्रकारेण दान अनेक प्रकार के यज्ञ तरह-तरह के तप तथा जप आदि भी महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकते। अतः अपने हित साधनार्थ सभी को इस व्रत का अवश्य पालन करना चाहिए।______इस महाशिव रात्रि पर राशि अनुसार करे ये ख़ास उपाय ओर दुर्भाग्य को दूर करे –
मेष राशि : मेष राशि का स्वामी मंगल है इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक कच्चे दुघ एवम दही से करे साथ ही भगवान शिव को पूजा मे गुलाब के फूल अर्पित करे।
वृषभ राशि : वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक गन्ने के रस से करे साथ ही भगवान शिव को मोगरे का इत्र भी अर्पित करे।
मिथुन राशि : मिथुन राशि का स्वामी बुध है इस राशि के जातक भगवान शिव तो बिल्व पत्र अर्पित करे साथ ही ओम नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करे।
कर्क राशि : कर्क राशि का स्वामी चंद्र है इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक कच्चे दूध मे शक्कर मिलकर करे साथ ही चंद्र शेखर स्त्रोत का भी पाठ करे।
सिंह राशि : सिंह राशि का स्वामी सुर्य है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक जल से करे साथ ही भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग भी लगावे।
कन्या राशि : कन्या राशि का स्वामी बुध है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करे साथ ही शिव तांडव स्त्रोत का भी पाठ करे।
तुला राशि : तुला राशि का स्वामी शुक्र है इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक पानी मे इत्र डालकर करे इसके बाद भगवान शिव का चंदन से स्रिंगार करे।
वृश्चिक राशि : इस राशि का स्वामी मंगल है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का शहद से अभिषेक करे तथा भगवान शिव को लाल मसूर की दाल भी अर्पित करे।
धनु राशि : इस राशि का स्वामी गुरु है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का चावल से सृंगार करे तथा पीली मिठाई का भोग भी लगावे।
मकर राशि : इस राशि का स्वामी शनि है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक दुघ मे गंगाजल मिलाकर करे साथ ही भगवान शिव को सूखे मेवे का भोग भी लगावे।
कुंभ राशि : इस राशि का स्वामी शनि है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक जल मे काले तिल मिलकर करे साथ ही शिव चालीसा का भी पाठ करे।
मीन राशि : मीन राशि का स्वामी गुरु है तथा इस राशि के जातक भगवान शिव का अभिषेक दूध मे केसर मिलकर करे साथ ही कपूर जलाकर भगवान की आरती करे।

श्री महाशिवरात्रि व्रत
नव ग्रह शांति के लिए उपाय______शास्त्र कहते हैं कि संसार में अनेकानेक प्रकार के व्रत, विविध तीर्थस्नान नाना प्रकारेण दान अनेक प्रकार के यज्ञ तरह-तरह के तप तथा जप आदि भी महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकते। अतः अपने हित साधनार्थ सभी को इस व्रत का अवश्य पालन करना चाहिए।_______नव ग्रह शांति के लिए वार अनुसार करे ये ख़ास उपाय मिलेगा शुभफल –
सोमवार : सोमवार चंद्र देव का वार है इसलिए शिवलिंग पर कक्चा दूध अवश्य अर्पित करे . साथ ही ओम श्री चंद्र देवाय नमः मंत्र का भी जाप करे इससे चंद्र ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
मंगलवार : मंगलवार मंगल देव का वार इसलिए शिवलिंग पर लाल मसूर की दल अवश्य अर्पित करे साथ ही ओम श्री मंगल देवाय नमः मंत्र का भी जाप करे इससे मंगल ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
बुधवार : बुधवार बुध देव का वार है इसलिए प्रति बुधवार शिवलिंग पर द्रुवा (एक प्रकार की घास) अवश्य अर्पित करे साथ ही ओम बुध देवाय नमः मंत्र का भी जाप करे इससे बुध ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
गुरुवार : गुरुवार देव गुरु बृहस्पति का वार है इस दिन शिवलिंग पर चने की दाल अवश्य अर्पित करे साथ ही ओम गुरुवे नमः मंत्र का भी जाप करे इससे गुरु ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
शुक्रवार : शुक्रवार देत्य गुरु शुक्र का वार है इस दिन शिवलिंग पर चावल अवश्य अर्पित करे लेकिन ध्यान रखे चावल खंडित ना हो साथ ही ओम शुक्राय नमः मंत्र का भी जाप करे इससे शुक्र ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
शनिवार : शनिवार शनि देव का वार है इस दिन शिवलिंग का जल मे काले तिल मिलकर अभिषेक करे साथ ही ओम सूर्यपुत्राय नमः मंत्र का भी जाप करे इससे शनि ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
शनिवार : जो जातक राहु ओर केतु के दोषो से परेशान वे शनिवार के दिन शिवलिंग का जल मे काले तिल मिलकर अभिषेक करे साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप करे इससे राहु ओर केतु ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।
रविवार : रविवार सूर्य देव का वार है इस दिन शिवलिंग पर गेहू अवश्य अर्पित करे साथ ही ओम सूर्याय नमः मंत्र का भी जाप करे इससे सूर्य ग्रह के दोष मे शांति मिलती है।

श्री महाशिवरात्रि व्रत मनोरथ पूर्ति उपाय_______शास्त्र कहते हैं कि संसार में अनेकानेक प्रकार के व्रत, विविध तीर्थस्नान नाना प्रकारेण दान अनेक प्रकार के यज्ञ तरह-तरह के तप तथा जप आदि भी महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकते। अतः अपने हित साधनार्थ सभी को इस व्रत का अवश्य पालन करना चाहिए।_____भगवान शिव के कुछ ख़ास उपाय जिन्हे करने से होंगे सभी मनोरथ पूर्ण एवम ग्रह शांति –
भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का निरंतर जाप करने से सभी मनोरथ की प्राप्ति होती है जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए.
जो लोग स्वयं का घर बनाने की इच्छा रखते है उन्हे अपनी इच्छा पूर्ति के लिए शिव रुद्राभिषेक – शहद से करना चाहिए
जो लोग अनावश्यक शत्रु पीड़ा से परेशान है उन्हे श्याम शिवलिंग का सरसो के तेल से रुद्राभिषेक करना चाहिए
संतान प्राप्ति के लिए मक्खन के शिवलिंग बनाकर गंगाजल से रुद्राभिषेक करे
परीक्षा मे सफलता प्राप्ति हेतु दूध – भांग मिलाकर शिवजी का पूजन करे
जो लोग किसी बीमारी से .परेशान है वे शिवजी का गाय के घी से भगवान शिव का अभिषेक करे
व्यापार मे तरक्की के लिए स्फटिक से बने शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करे
सभी प्रकार के सुखो की प्राप्ति हेतु पारे के बने शिवलिंग का नित्य पूजन करे
जो लोग आर्थिक तंगी से परेशान है वे लोग शिव दरिद्रदहन स्त्रोत का नियमित रूप से पाठ करे
जो लोग शनि, राहु , केतु की महादशा से परेशान है वे लोग भगवान शिव का अभिषेक पानी मे काले तिल मिलकर करे
पुत्र प्राप्ति के लिए नियमित रूप से सोमवार का व्रत रखे साथ ही शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करे
अगर आपके जीवन मे अकारण ही परेशानिया आ रही है तो भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जप करना परम फलदायी है
भगवान शिव को चंदन का इत्र अर्पित करने से अखंड वेभव की प्राप्ति होती है
अगर आप मानसिक परेशानियो से परेशान है तो भगवान शिव का अभिषेक दूध मे शक्कर मिलाकर करे
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए नियमित रूप से संध्या के समय रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करे

शिवरात्रि भोलेनाथ का महापर्व
भूलकर भी न करें 7 गलतियां_______ज्योतिष शास्त्र में साधना के लिए तीन रात्रि विशेष मानी गई हैं। इनमें शरद पूर्णिमा को मोहरात्रि, दीपावली की कालरात्रि तथा महाशिवरात्रि को सिद्ध रात्रि कहा गया है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है।______महाशिवरात्रि को शिव पुराण और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इस व्रत को लेकर कई नियम भी बताए गए हैं। जिनका पालन न करने पर व्यक्ति भगवान शिव की कृपा से वंचित रह जाता है। आइए जानते हैं आखिर इस पावन पर्व पर व्यक्ति को वो कौन से काम हैं जो नहीं करने चाहिए।
शिव पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां
शंख जल- भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु का भक्त था इसलिए विष्णु भगवान की पूजा शंख से होती है शिव की नहीं।
पुष्प- भगवान शिव की पूजा में केसर, दुपहरिका, मालती, चम्पा, चमेली, कुन्द, जूही आदि के पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए।
करताल- भगवान शिव के पूजन के समय करताल नहीं बजाना चाहिए।
तुलसी पत्ता- जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया है। इसलिए तुलसी से शिव जी की पूजा नहीं होती है।
काला तिल- यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए।
टूटे हुए चावल- भगवान शिव को अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नहीं चढ़ाया जाता है।
कुमकुम- यह सौभाग्य का प्रतीक है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ता।

शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये चीजें
सभी मनोकामनाएं होंगी पूरी______महाशिवरात्रि शिव की रात्री है यानी कि भक्तों के लिए सुख की वो रात्रि जिसमें पूरा माहौला शिवमय हो जाता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. शिव भक्तोंश के लिए महाशिवरात्रि का दिन विशेष महत्वो रखता है.______पौराणिका मान्यहताओं के अनुसार इस दिन जो भी भक्त सच्चेव मन से देवादि देव महादेव की आराधना करता है उसका बेड़ा पार हो जाता है. यही वजह है कि भक्ते नान प्रकार के जतन कर अपने आराध्य को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने का विशेष महत्वस है. कहते हैं कि शिव शंकर तो जल मात्र चढ़ाने से ही संतुष्ट) हो जाते हैं. लेकिन फिर भी अगर आप किसी विशेष मनोकामना के लिए शिवरात्रि का व्रत कर रहे हैं तो कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाकर आप महादेव की विशेष कृपा पा सकते हैं.
जल: अगर आपके पास कुछ नहीं है तब भी आप केवल निर्मल जल से शिव शंकर का जलाभिषेक कर सकते हैं. कहते हैं कि अगर परिवार के किसी सदस्य को तेज बुखार हो तो शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए.
गंगा जल: मान्यहता है कि शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाने से भक्ति को भौतिक सुख तो मिलते ही साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.
बेलपत्र: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र चढ़ाने से शिव जी का मस्तक शीतल रहता है. बेल पत्र से भगवान शिव की पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है.
गन्ने का रस: मान्येता है कि शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है.
देसी घी: मान्याताओं के अनुसार शारीरिक दुख और दुर्बलता से छुटकारा पाने के लिए शिवलिंग पर गाय के दूध से बना शुद्ध देसी घी चढ़ाना चाहिए.
फूल: मान्य्ता है कि दुखों से मुक्ति के लिए श‍िवलिंग पर शमी के पत्ते, सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए बेला के फूल, धन-धान्यो के लिए जूही के फूल और समृद्धि के लिए हर-सिंगार के फूल चढ़ाने चाहिए.
धतूरा और गेहूं: मान्यैता है कि शिवलिंग पर धतूरा और गेहूं चढ़ाने से योग्यह संतान की प्राप्तिे होती है.
दूध: कहते हैं कि अगर दूध में चीनी मिलाकर शिवलिंग को अर्पित की जाए तो मस्तिष्कग तेज होता है और मनोवांछित फल मिलता है.

भगवान भोलेनाथ को क्यों पसंद है भांग और धतूरा,
जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण_____भोलेनाथ की पूजा का सबसे खास दिन महाशिवरात्रि । महाशिवरात्रि पर शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्त भांग धतूरा भी चढ़ाते हुए दिख जाएंगे। लेकिन कभी सोचा है भगवान शिव को ऐसी नशीली चीजें क्यों अच्छी लगती है। आइए, आज जानते है भगवान भोलेनाथ को क्यों पसंद है भांग और धतूरा…………..इसके पीछे पुराणों में जहां धार्मिक कारण बताया गया है वहीं इसका वैज्ञानिक आधार भी है।
वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो भगवान शिव को कैलाश पर्वत पर रहने वाला बताया गया है। यह अत्यंत ठंडा प्रदेश है जहां ऐसे आहार और औषधि की जरुरत होती है जो शरीर को गर्माहट प्रदान करे। वैज्ञानिक दृष्टि से भांग और धतूरा सीमित मात्रा में लिया जाए तो औषधि का काम करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है।
शिव जी के भांग खाने का धार्मिक कारण
धार्मिक दृष्टि से इसका कारण देवी भागवत पुराण में बताया गया है। इस पुराण के अनुसार शिव जी ने जब सागर मंथन से निकले हालाहल विष को पी लिया तब वह व्याकुल होने लगे। तब अश्विनी कुमारों ने भांग, धतूरा, बेल आदि औषधियों से शिव जी की व्याकुलता दूर की। उस समय से ही शिव जी को भांग धतूरा प्रिय है। जो भी भक्त शिव जी को भांग धतूरा अर्पित करता है, शिव जी उस पर प्रसन्न होते हैं।

महा शिवरात्रि पर मनोकामना पूर्ति हेतु उपाय_______महाशिवरात्रि, हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। हर साल यह पर्व फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि पर्व फरवरी को है। यह पावन पर्व देवों के देव महादेव भोलेनाथ को समर्पित है। इस दिन शिव भक्त महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए कई उपाय करते हैं। मनोकामना पूर्ति के लिए शिवरात्रि के दिन जातकों के उपाय करने चाहिए:-

इस उपाय से होगी मनोकामना पूरी –
शास्त्रों में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन मनुष्य को अपनी मनोकामना के अनुसार शिव की पूजा करनी चाहिए। जो व्यक्ति सांसारिक मोह माया से मुक्त होना चाहते हैं और शिवजी के चरणों में स्थान पाने की कामना रखते हैं। ऐसे जातकों को महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए और रात्रि जागरण में शिव पुराण का पाठ करना या सुनना चाहिए।
आर्थिक समस्याओं का होगा निदान –
जो व्यक्ति काफी समय से वाहन खरीदने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है। तो महाशिवरात्रि के दिन दही से भगवान शिव का अभिषेक करें। आर्थिक समस्याओं के कारण जो लोग परेशान और चिंतित रहते हैं उनके लिए महाशिवरात्रि पर शिव जी की पूजा का खास विधान है। ऐसे लोगों को शहद और घी से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। प्रसाद के तौर पर भोलेनाथ को गन्ना अर्पित करें।
अच्छी सेहत के लिए करें ये यह उपाय –
जो व्यक्ति अक्सर बीमार रहते हैं या जिनके स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है उन्हे महाशिवरात्रि के मौके का लाभ उठाना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि भोलेनाथ कालों के भी काल हैं जिनके सामने यम भी हाथ जोड़े खड़े रहते हैं। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन बेहतर स्वास्थ्य की इच्छा रखने वालों को जल में दुर्वा मिलाकर शिव जी को अर्पित करना चाहिए। जितना अधिक संभव हो महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
संतान प्राप्ति के लिए करें यह काम –
जो दंपत्ति योग्य संतान की अभिलाषा रखते हैं उन्हें महाशिवरात्रि के दिन दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शिव के साथ ही मां पार्वती और गणेश एवं कार्तिक की पूजा भी संतान सुख के योग मजबूत बनाता है।

क्‍यों मनाई जाती है शिवरात्रि?_________महाशिवरात्रि हिन्‍दू धर्म के प्रमुख त्‍योहरों में से एक है. शिव भक्‍त साल भर अपने आराध्‍य भोले भंडारी की विशेष आराधना के लिए इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं. इस दिन शिवालयों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाकर भक्‍त शिव शंकर को प्रसन्‍न करने की कोशिश करते हैं. मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से शिविलंग का अभिषेक या जल चढ़ाते हैं उन्‍हें महादेव की विशेष कृपा मिलती है. कहते हैं कि शिव इतने भोले हैं कि अगर कोई अनायास भी शिवलिंग की पूजा कर दे तो भी उसे शिव कृपा प्राप्‍त हो जाती है. यही कारण है कि भगवान शिव शंकर को भोलेनाथ कहा गया है. आपको बता दें कि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को सिर्फ शिवरात्रि कहा जाता है. लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाले शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं. साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.

शिवरात्रि मनाए जाने को लेकर तीन मान्‍यताएं प्रचलित हैं :
एक पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिव जी पहली बार प्रकट हुए थे. मान्‍यता है कि शिव जी अग्नि ज्‍योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हु थे, जिसका न आदि था और न ही अंत. कहते हैं कि इस शिवलिंग के बारे में जानने के लिए सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने हंस का रूप धारण किया और उसके ऊपरी भाग तक जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन उन्‍हें सफलता नहीं मिली. वहीं, सृष्टि के पालनहार विष्‍णु ने भी वराह रूप धारण कर उस शिवलिंग का आधार ढूंढना शुरू किया लेकिन वो भी असफल रहे.
एक अन्‍य पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही विभन्नि 64 जगहों पर शिवलिंग उत्‍पन्न हुए थे. हालांकि 64 में से केवल 12 ज्‍योर्तिलिंगों के बारे में जानकारी उपलब्‍ध. इन्‍हें 12 ज्‍योर्तिलिंग के नाम से जाना जाता है.
तीसरी मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि की रात को ही भगवान शिव शंकर और माता शक्ति का विवाह संपन्न हुआ था.
पूजन सामग्री –
महाशिवरात्रि के व्रत से एक दिन पहले ही पूजन सामग्री एकत्रित कर लें, जो इस प्रकार है: शमी के पत्ते, सुगंधित पुष्‍प, बेल पत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्‍ठान, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा, पूजा के बर्तन आदि.

महाशिवरात्रि की पूजन विधि –
महाशिवरात्रि के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और व्रत का संकल्‍प लें.
इसके बाद शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
जल चढ़ाने के लिए सबसे पहले तांबे के एक लोटे में गंगाजल लें. अगर ज्‍यादा गंगाजल न हो तो सादे पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं.
अब लोटे में चावल और सफेद चंदन मिलाएं और “ऊं नम: शिवाय” बोलते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
जल चढ़ाने के बाद चावल, बेलपत्र, सुगंधित पुष्‍प, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्‍चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, मौली, जनेऊ और पंच मिष्‍ठान एक-एक कर चढ़ाएं.
अब शमी के पत्ते चढ़ाते हुए ये मंत्र बोलें: –
अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
शमी के पत्ते चढ़ाने के बाद शिवजी को धूप और दीपक दिखाएं.
फिर कर्पूर से आरती कर प्रसाद बांटें.
शिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण करना फलदाई माना जाता है.
शिवरात्रि का पूजन ‘निशीथ काल’ में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है. रात्रि का आठवां मुहूर्त निशीथ काल कहलाता है. हालांकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से किसी भी एक प्रहर में सच्‍ची श्रद्धा भाव से शिव पूजन कर सकते हैं.
पूजा का मंत्र –
महाशिवरात्रि के दिन शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए.

बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र –
नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च
नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च
नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च
नमो दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च
नमो घृश्णवे॥
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌।
अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌॥
अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌।
कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥
गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर।
सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय।