एसआरएचयू में प्रीडेटरी पब्लिशिंग पर सेमिनार आयोजित

18-September-2025
एसआरएचयू में प्रीडेटरी पब्लिशिंग पर सेमिनार आयोजित
– विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को दी अनैतिक प्रकाशन प्रथा से बचाव की जानकारी
– शोधकर्ताओं के लिए जर्नल की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी

डोईवाला________स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में प्रीडेटरी पब्लिशिंग पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने शोधकर्ताओं को अनैतिक प्रकाशन प्रथाओं के विषय में जानकारी देने के साथ जागरूक किया।
एसआरएचयू स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की अनुसंधान समिति की ओर से बीसी रॉय सभागार में आयोजित सेमिनार का शुभारंभ डॉ. स्वामी राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस दौरान कुलपति डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने कहा कि प्रीडेटरी पब्लिशिंग एक प्रकार की अनैतिक प्रकाशन प्रथा है। इस सेमिनार के माध्यम से शोधकर्ताओं को ऐसी पत्रिकाओं से बचने के बारे में जानकारी मिलेगी जो शोध की गुणवत्ता की उपेक्षा करती हैं और अपने स्वार्थ के लिए खुला एक्सेस मॉडल का दुरुपयोग करती हैं। डीन डॉ. प्रीति कोठियाल ने सेमिनार के उद्देश्य और शोधकर्ताओं को प्रीडेटरी पब्लिशिंग की भूमिका से अवगत कराया।
मुख्य वक्ता जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के डॉ. पुलोक मुखर्जी ने प्रतिभागियों को शैक्षिक प्रकाशन में ईमानदारी चुनौतियां, विफलताएं और सुधार विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अनुसंधान ईमानदारी को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारों पर जोर दिया। कहा कि प्रीडेटरी पब्लिशिंग एक बढ़ती हुई समस्या है, जिससे शोधकर्ताओं को सावधान रहने की जरूरत है। उन्होनें कहा कि शोधकर्ताओं को जर्नल की विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए और फर्जी प्रकाशन प्रथाओं से बचना चाहिए। इससे विज्ञान की विश्वसनीयता बनी रहेगी और शोधकर्ताओं की प्रतिष्ठा भी सुरक्षित रहेगी। वक्ता पतंजलि हरिद्वार के डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने वैज्ञानिक दुनिया में प्रीडेटरी पब्लिशिंग से कैसे बचें विषय पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। डॉ. संजीव कुमार वार्ष्णेय ने शोध को प्रकाशित करने के चरण विषय पर एक संरचित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. मनोरमा त्रिपाठी ने विद्वानों के संचार परिदृश्य को नेविगेट करना विषय पर प्रामाणिक पत्रिकाओं को पहचानने और विद्वानों की दृश्यता बढ़ाने के लिए रणनीतियों की जानकारी दी। इस अवसर पर निदेशक अनुसंधान डॉ. बिंदू डे सहित फैकल्टी, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। डॉ. गणेश कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।