क्या आज़ाद भारत में छात्रों की आवाज़ का जवाब लाठी है?”छात्रों पर कथित बल प्रयोग को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग —
लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने पूरे देश को झकझोर दिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर ऐसे आरोप सामने आए हैं कि प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों के साथ बल प्रयोग हुआ तथा कुछ लोगों ने दुर्व्यवहार के भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए इनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।आज देश का हर युवा एक सवाल पूछ रहा है—क्या अपने अधिकारों और भविष्य की बात करना अब अपराध बन गया है? क्या आज़ाद भारत में छात्रों की आवाज़ का जवाब लाठी और हिरासत होगी?भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। यदि छात्र अपनी शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं, तो उनकी बात सुनना लोकतंत्र की मजबूती है, न कि उसे बलपूर्वक दबाना।यदि प्रदर्शन के दौरान किसी भी छात्र, छात्रा, पत्रकार या नागरिक के साथ कानून के दायरे से बाहर जाकर दुर्व्यवहार हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष न्यायिक जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि किसी पक्ष द्वारा गलत या भ्रामक दावे किए गए हैं, तो उन्हें भी तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।देश का भविष्य हमारे छात्र हैं। उन्हें डर का नहीं, विश्वास का माहौल मिलना चाहिए। लोकतंत्र की पहचान संवाद, संवेदनशीलता और कानून के निष्पक्ष पालन से होती है।हम केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन से मांग करते हैं कि:पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए।यदि किसी के साथ अनुचित बल प्रयोग हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए।भविष्य में ऐसे मामलों में संवाद और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाए।_________याद रखिए—”जब छात्रों की आवाज़ दबाई जाती है, तो केवल कुछ युवाओं की नहीं, बल्कि देश के भविष्य की आवाज़ कमजोर होती है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज़ है, और छात्रों की आवाज़ उसी लोकतंत्र की धड़कन है।”जय हिंद।
