हिम्स जौलीग्रांट में पीआईसीसी कैथेटर कैनुलेशन पर कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा की उन्नत तकनीक

हिम्स जौलीग्रांट में पीआईसीसी कैथेटर कैनुलेशन पर कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा की उन्नत तकनीक

डोईवाला********** 22 जून हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स), जौलीग्रांट के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (आईएससीसीएम) देहरादून शाखा एवं टेलीफ्लेक्स के सहयोग से पेरिफेरली इंसर्टेड सेंट्रल कैथेटर (पीआईसीसी) कैनुलेशन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ को पीआईसीसी तकनीक की नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना रहा।बीसी रॉय सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ हिम्स के डीन डॉ. ए. शरीफ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही तकनीकों के साथ अद्यतन रहना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पीआईसीसी कैथेटर जैसी उन्नत प्रक्रियाओं की बेहतर समझ गंभीर मरीजों के उपचार, संक्रमण नियंत्रण तथा सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।कार्यक्रम की शुरुआत में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिका अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसमें 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें कंसल्टेंट चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्स प्रैक्टिशनर तथा आईसीयू नर्स शामिल थे।वैज्ञानिक सत्र में डॉ. मंदीप सिंह खालसा ने पीआईसीसी लाइन के लिए मरीजों के चयन, इसके लाभ एवं सीमाओं पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं एम्स ऋषिकेश के एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग के डॉ. अंकित अग्रवाल ने पीआईसीसी कैथेटर लगाने की तकनीक, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं एवं आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला।कार्यशाला के व्यावहारिक सत्र में पीआईसीसी नर्स एवं ट्रेनर प्रियंका ने प्रतिभागियों को पीआईसीसी लाइन से जुड़ी संभावित जटिलताओं, उनकी रोकथाम तथा प्रभावी प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए आधुनिक क्रिटिकल केयर प्रबंधन में पीआईसीसी लाइन की बढ़ती उपयोगिता पर भी चर्चा की।********कार्यक्रम में डॉ. सोनिका अग्रवाल, डॉ. सोनू समा, डॉ. मंदीप सिंह खालसा, डॉ. अंकित अग्रवाल सहित अनेक विशेषज्ञ एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक रूप से अत्यंत उपयोगी बताया

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