1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों कमशः भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। इन कानूनों में महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान है।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है, किसी बच्चे को खरीदना और बेचना जघन्य अपराध माना गया है और किसी नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के लिए मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान जोड़ा गया है।
शादी का झूठा वादा करने, नाबालिग से दुष्कर्म, भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने, आदि मामले दर्ज किए जाते हैं लेकिन मौजूदा भारतीय दंड संहिता में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं थे। भारतीय न्याय संहिता में इनसे निपटने के लिए प्रावधान किये गए हैं।
दुष्कर्म पीड़िताओं का बयान कोई महिला पुलिस अधिकारी उसके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज करेगी और मेडिकल रिपोर्ट सात दिन के भीतर देनी होगी।
नये कानूनों में महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को प्राथमिकता दी गयी है जिससे मामले दर्ज किए जाने के दो महीने के भीतर जांच पूरी की जाएगी। नये कानूनों के तहत पीड़ितों को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा।
नये कानूनों में, महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में पीड़ितों को सभी अस्पतालों में निशुल्क प्राथमिक उपचार या इलाज मुहैया कराया जाएगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि पीड़ित को आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल तुरंत मिले।
महिलाओं, पंद्रह वर्ष की आयु से कम उम्र के लोगों, 60 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों तथा दिव्यांग या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को पुलिस थाने आने से छूट दी जाएगी और वे अपने निवास स्थान पर ही पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 43 (5) के मुताबिक, असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर, किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता. अगर ऐसी असाधारण परिस्थितियां हैं, तो महिला पुलिस अधिकारी को लिखित रिपोर्ट देकर, उस प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी.
महत्वपूर्ण नंबर☎️*****महिला हेल्पलाइन नंबर:181,,,,,,,,साइबर हेल्पलाइन:1930,,,,,,,,,,,,,,चाइल्ड हेल्पलाइन :1098,,,,,,,,,,,पुलिस हेल्पलाइन : 112,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,घरेलू हिंसा, घरेलू उत्पीड़न और दुर्व्यवहार हेल्पलाइन:1091*************राष्ट्रीय महिला आयोग हेल्पलाइन 24×7 : 7827170170
भारतीय न्याय संहिता 2023 की महत्वपूर्ण धारा
धारा 64********किसी महिला के साथ दुष्कर्म करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64 के तहत न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
धारा 74******यदि किसी महिला पर उसकी गरिमा भंग करने के इरादे से हमला किया जाए या अपराधिक बल प्रयोग किया जाए, तो “भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 74 के तहत 5 वर्ष तक कारावास या जुमनि की सजा हो सकती है।
धारा 75********किसी महिला का यौन उत्पीड़न या उस पर अश्लील टिप्पणी करने पर “भारतीय न्याय संहिता 2023” की धारा 75 के तहत 3 वर्ष तक कारावास या जुर्माना लगाया जा सकता है।
धारा 78******किसी महिला का पीछा करना, उसके साथ संपर्क साधने का प्रयास करना, या मोबाइल फोन व इंटरनेट साधनौ का उपयोग करके उसकी निगरानी करना ‘भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 78 के तहत 5 वर्ष तक कारावास या जुर्माने के तहत दंडनीय है।
धारा 79******किसी महिला की गरिमा भंग करने के उद्देश्य से शब्द, इशारे, या किसी अन्य माध्यम से उसकी निजता में बाधा डालने पर धारा 79 के तहत 3 वर्ष तक कारावास या जुर्माना लगाया जा सकता है।
धारा 80 (2)******यदि कोई व्यक्ति दहेज हत्या के अपराध का दोषी (Guilty) पाया जाता है तो उसे धारा 80 की उपधारा_______2 के तहत दंडित (Punished) किया जाता है। जिसमें उसे किए गए अपराध की गंभीरता के आधार पर_____कम से कम 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की कैद व जुमनि की सजा दी जा सकती है।
धारा 84********किसी विवाहित महिला को आपराधिक इरादे से फुसलाना या ले जाना या हिरासत में रखता है तो दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 85*******किसी महिला के पति या पति की नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना जो कोई, किसी महिला का पति या पति का नातेदार होते हुए, ऐसी महिला के प्रति क्रूरता करेगा, तो तीन वर्ष तक कैद हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
