करवा चौथ पर सभी को अवकाश, तो पुलिस की महिला कर्मियों के साथ भेदभाव क्यों?

महिला पुलिसकर्मियों की भावनाओं और पारिवारिक अधिकारों का भी हो सम्मान देहरादून🌿🌿🌿🌿🌿उत्तराखंड🏵️🏵️उत्तराखंड में करवा चौथ के अवसर पर सरकारी विभागों में कार्यरत महिलाओं को अवकाश दिए जाने की चर्चा के बीच महिला पुलिसकर्मियों को छुट्टी न मिलना एक गंभीर और संवेदनशील विषय है। यदि अन्य विभागों की महिला कर्मचारियों को त्योहार मनाने के लिए अवकाश दिया जा सकता है, तो पुलिस विभाग की महिला कर्मियों को इस सुविधा से वंचित क्यों रखा जाए?
पुलिसकर्मी भी किसी की बेटी, बहन, पत्नी और माँ हैं। वर्दी पहनकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाली महिला पुलिसकर्मियों की भी भावनाएँ, परिवार और त्योहार होते हैं। 🌿🌿🌿🌿🌿कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली इन महिलाओं की पारिवारिक भावनाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।🌿🌿🌿🌿🌿क्या पुलिस की वर्दी पहनने वाली महिलाओं को अपने त्योहार और परिवार के लिए समय माँगने का अधिकार नहीं है?
यह किसी भी तरह से पुलिसकर्मियों के कर्तव्य के प्रति सवाल नहीं, बल्कि उनके साथ समानता और संवेदनशीलता से व्यवहार किए जाने की माँग है। पुलिस विभाग की आवश्यक सेवाओं और ड्यूटी की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए छुट्टी की व्यवस्था, वैकल्पिक ड्यूटी या शिफ्ट में बदलाव जैसे व्यावहारिक विकल्प अपनाए जा सकते हैं, ताकि कानून-व्यवस्था भी प्रभावित न हो और महिला कर्मियों को त्योहार मनाने का अवसर भी मिल सके।
हम उत्तराखंड सरकार, पुलिस मुख्यालय और संबंधित अधिकारियों से माँग करते हैं कि महिला पुलिसकर्मियों की करवा चौथ की छुट्टी से संबंधित स्थिति स्पष्ट की जाए तथा जहाँ अवकाश देना संभव हो, वहाँ उन्हें भी समान अवसर प्रदान किया जाए। विशेष परिस्थितियों में ड्यूटी आवश्यक होने पर वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाए।
हमारा स्पष्ट संदेश है—पुलिसकर्मी होना अपने परिवार और भावनाओं से दूर हो जाना नहीं है। जो महिलाएँ दूसरों की सुरक्षा के लिए दिन-रात ड्यूटी करती हैं, उनकी भावनाओं और सम्मान का ख्याल रखना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
नारी सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
