भोजन की शुद्धि से भजन की शुद्धि होती है : आर्यिका रत्न श्री पूर्णमति माताजी

भोजन की शुद्धि से भजन की शुद्धि होती है : आर्यिका रत्न श्री पूर्णमति माताजी

भोजन की शुद्धि से भजन की शुद्धि होती है : आर्यिका रत्न श्री पूर्णमति माताजी

देहरादून।__________ परम पूज्य आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन, देहरादून में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक आयोजित किए जा रहे हैं। सोमवार को भक्तों द्वारा नित्य नियम पूजन के साथ जैन मिलन पद्मावती की ओर से परम पूज्य आचार्य श्री की पूजा-अर्चना श्रद्धापूर्वक की गई।तत्पश्चात धर्मसभा का शुभारंभ पूज्य आर्यिका रत्न श्री पूर्णमति माताजी द्वारा णमोकार महामंत्र के शुद्ध उच्चारण के साथ किया गया।धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरुमाँ ने कहा कि “आचार्य कहते हैं—जिसकी भोजन शुद्धि होती है, उसकी भजन शुद्धि भी होती है।” उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में तन और मन की शुद्धि के लिए भोजन की शुद्धता एवं संतुलन का विशेष महत्व है। भोजन केवल शरीर को ऊर्जा देने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव हमारे विचारों, व्यवहार और आध्यात्मिक जीवन पर भी पड़ता है।माताजी ने भादो माह में खान-पान के संबंध में विशेष सावधानी बरतने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इस अवधि में पत्तियों वाली हरी सब्जियों का सेवन सीमित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौसम के अनुरूप और संतुलित भोजन करना आवश्यक है। भोजन में अत्यधिक विविधता और असंतुलन रखने से पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है, इसलिए व्यक्ति को अपने खान-पान में संयम और संतुलन रखना चाहिए।उन्होंने विशेष रूप से रात्रि भोजन त्याग की प्रेरणा देते हुए कहा कि चातुर्मास के दौरान रात्रि भोजन से बचना स्वास्थ्य और धर्म—दोनों दृष्टियों से लाभकारी है। यदि व्यक्ति एक समय के भोजन से अपना कार्य चला सकता है तो उसे अनावश्यक रूप से बार-बार भोजन करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान भी यह मानता है कि सोने से कई घंटे पहले भोजन कर लेना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।माताजी ने कहा कि अनेक श्रद्धालु यह अनुभव साझा करते हैं कि जब से उन्होंने रात्रि भोजन त्याग का नियम लिया है, तब से उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और शरीर में हल्कापन महसूस होने लगा है। उन्होंने कहा कि हमारे आचार्यों ने जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े अनेक वैज्ञानिक सिद्धांत सदियों पहले ही बताए हैं, जिन्हें आज आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार कर रहा है।उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पर्यूषण पर्व की पूर्णता तक भादो माह में विशेष संयम रखते हुए रात्रि में अन्न का सेवन न करने का संकल्प लें। इससे स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभ होगा और धार्मिक दृष्टि से भी आत्मसंयम एवं तप की भावना मजबूत होगी।गुरुमाँ ने कहा कि मनुष्य के जीवन में समस्याएं एक के बाद एक आती रहती हैं। व्यक्ति सोचता है कि एक परेशानी समाप्त हो गई, लेकिन उसके समाप्त होते ही दूसरी समस्या सामने आ जाती है। कभी स्वास्थ्य संबंधी चिंता, कभी आर्थिक समस्या, कभी परिवार की जिम्मेदारी तो कभी बच्चों की फीस, बिजली का बिल, गैस या अन्य आवश्यकताओं से जुड़ी चिंताएं व्यक्ति को तनावग्रस्त करती रहती हैं। इसलिए आवश्यक है कि व्यक्ति बाहरी परिस्थितियों के साथ-साथ अपने भीतर भी संतुलन बनाए रखे।उन्होंने कहा कि जीवन में पूर्ण सुख तभी संभव है, जब व्यक्ति अपने तन, मन और आहार—तीनों के प्रति जागरूक रहे। संयमित भोजन, नियमित दिनचर्या, धार्मिक साधना और सकारात्मक चिंतन व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारीकार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि 1 सितंबर को जैन मिलन भाग्य ज्योति एवं जैन मिलन महावीर द्वारा परम पूज्य आचार्य श्री की पूजा-अर्चना की जाएगी।उन्होंने बताया कि वर्षायोग के दौरान नित्य प्रतिदिन पूज्य माताजी की आहारचर्या, नित्य सामायिक, नित्य पाठशाला, सायंकालीन महाआरती, शंका-समाधान सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं।इस अवसर पर जैन समाज के अनेक श्रद्धालु, श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति तथा सकल दिगम्बर जैन समाज, देहरादून के अनेक सदस्य एवं पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।मधु सचिन जैन मीडिया समन्वयक देहरादून जैन समाज

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