अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पात्रता परीक्षा फैसले का किया घोर विरोध

अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पात्रता परीक्षा फैसले का किया घोर विरोध

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए बीते दिन शुक्रवार को शिक्षकों के लिए अनिवार्य रुप से शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का पुनः फैसला सुनाया गया जिसमें बेसिक के प्रत्येक शिक्षक शिक्षिकाओं को अनिवार्य रूप से टी ई टी पास करना होगा, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देश के पच्चीस लाख शिक्षक शिक्षिकाएं प्रभावित होने पर तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि आर टी ई अधिनियम 2009 /1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था उसके पश्चात ही प्रत्येक शिक्षक शिक्षिकाओं को अनिवार्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना था, त्यागी ने कहा कि 2011 से पूर्व प्रत्येक शिक्षक शिक्षिकाएं अपनी योग्यता के अनुसार सेवा में आए हैं जिनका अपनी सेवाकाल के दौरान बहुत ही सराहनीय कार्य रहा है। सरकार की सोची समझी रणनीति के तहत सुप्रीम कोर्ट से शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का फैसला करवाकर देश के लाखों लाख शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है जिसका संगठन घोर विरोध करता है,योगेश त्यागी ने देश के शिक्षकों से अपील की है कि अब आर पार की लडा़ई के लिए कमर कसनी होगी चाहे अंजाम कुछ भी हो पीछे नहीं हटना होगा। अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुभाष चोहान ने कहा कि वर्तमान में शासन में बैठे जिम्मेदार लोग अनावश्यक शिक्षकों को परेशान कर रहें हैं शिक्षकों की जैनविन मांग व समस्याओं का समाधान करने के बजाय तमाम प्रकार के तुगलकी फरमान जारी कर रहें हैं जिस कारण शिक्षक सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं जिसका प्रतिकूल प्रभाव आने वाले देश के कर्णधारों पर पड़ रहा है,जो सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं है। प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उतराखंड के मंडलीय सचिव सैन सिंह नेगी ने कहा कि 2017 एन सी ई टी में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि 2011 से पूर्व शिक्षक शिक्षिकाओं को अनिवार्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना है ,नेगी ने यह भी कहा कि यदि पच्चास से अधिक उम्र में किसी भी अधिकारी या न्याधीश को परीक्षा पास करने के लिए कहा जायेगा तो वे किसी भी परीक्षा को पास नहीं कर पायेगें।नेगी ने कहा कि वर्तमान में जो देश और उत्तराखंड में शिक्षकों के विरुद्ध फरमान जारी किए जा रहें हैं उसे शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है,जिसका दुष्प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है।शिक्षक पदाधिकारियों ने कहा कि यदि केन्द्र व राज्य में इसी प्रकार से शिक्षक विरोधी नीति रही तो आने वाले समय में शिक्षक सरकार के खिलाफ मुखर होकर सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर होगें जिसका दुष्प्रभाव सरकारों पर पड़ेगा।नेगी ने यह भी कहा कि यदि की ई टी का मामला नहीं सुलझता है तो सरकारी विद्यालयों में विषयवार अध्यापक नहीं होने से गरीब बच्चों का भविष्य मझधार में रह जाएगा और गरीब का बच्चा कभी भी आगे नहीं बढ़ पायेगा ऐसी हमारी सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग भी चाहते हैं सैंन सिंह नेगी मंडलीय सचिव गढ़वाल प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखंड

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