3मार्च वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण_ प्रभाव, सूतक काल🌑

चंद्र ग्रहण – प्रभाव, सूतक काल

वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को लग रहा है। इसे वर्ष के सबसे लंबी अवधि वाले चंद्र ग्रहणों में से एक माना जा रहा है। इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा। चूँकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य रहेगा।_चंद्र ग्रहण का समय दोपहर 3:20 बजे
पूर्ण चंद्र ग्रहण (खग्रास) प्रारंभ : शाम 4:34 बजे
ग्रहण समाप्ति : शाम 6:47 बजे
ग्रहण के वैश्विक चरण (भारतीय समयानुसार) –
पेनुम्ब्रल ग्रहण प्रारंभ – दोपहर 2:14 बजे
आंशिक ग्रहण प्रारंभ – 3:20 बजे
पूर्ण (खग्रास) ग्रहण प्रारंभ – 4:34 बजे
ग्रहण का मध्य (Peak) – लगभग 5:04 बजे
पूर्ण ग्रहण समाप्त – लगभग 5:59 बजे
आंशिक ग्रहण समाप्त – 6:47 बजे
पेनुम्ब्रल ग्रहण समाप्त – 7:53 बजे
भारत में कितनी देर दिखाई देगा?
भारत में इस दिन चंद्रोदय लगभग शाम 6:22 बजे होगा (शहर अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है)।
चूँकि ग्रहण की समाप्ति 6:47 बजे है, इसलिए भारतीय दर्शकों को यह दृश्य लगभग 20 से 25 मिनट तक ही दिखाई देगा।
उदाहरण के लिए :
दिल्ली में चंद्रोदय लगभग 6:22 बजे
अन्य शहरों में 2–5 मिनट का अंतर संभव
अर्थात भारत में ग्रहण का अंतिम चरण (छाया से बाहर आता हुआ चंद्रमा) ही देखा जा सकेगा।
सूतक काल कब लगेगा? –
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पूर्व सूतक काल आरंभ हो जाता है।
इस आधार पर –
सूतक प्रारंभ : 3 मार्च की सुबह 6:20 बजे से
सूतक समाप्ति : ग्रहण समाप्ति के बाद (लगभग 6:47 बजे के पश्चात)
सूतक काल में किन कार्यों से बचें ?
शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश आदि टालें
पूजा की मूर्तियों को स्पर्श न करें
भोजन पकाने और खाने से परहेज करें
बाल और नाखून काटना वर्जित माना जाता है
सिलाई, कढ़ाई या तेजधार वस्तुओं का उपयोग न करें
पंचांग और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व –
यह ग्रहण सिंह राशि में पड़ रहा है, अतः सिंह राशि तथा चंद्रमा से संबंधित भावों पर विशेष प्रभाव माना जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय घटना है, जबकि धार्मिक दृष्टि से इसे ऊर्जा परिवर्तन का काल माना गया है।
चंद्र ग्रहण कैसे लगता है? –
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।
सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती और उस पर पृथ्वी की छाया पड़ जाती है।
इस समय चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे ही ब्लड मून कहते हैं।
चंद्र ग्रहण के दौरान किए जाने वाले आध्यात्मिक उपाय
ग्रहण काल को साधना और आत्मशुद्धि के लिए विशेष समय माना गया है। इस दौरान किए गए जप-तप का फल सामान्य समय से अधिक माना जाता है।

मंत्र जाप करें
“ॐ सोमाय नमः”
“ॐ चंद्राय नमः”
महामृत्युंजय मंत्र
इन मंत्रों का श्रद्धा से जप करने से मानसिक शांति और चंद्र दोष शमन में सहायता मानी जाती है।
_दान करें
ग्रहण समाप्ति के बाद दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
विशेष रूप से दान करें:
सफेद वस्त्र
चावल
चीनी
दूध
चांदीस्नान एवं शुद्धिकरण
ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
घर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण करें।
तुलसी या कुश का प्रयोग
ग्रहण से पहले बने भोजन में तुलसी पत्ती या कुश डालने की परंपरा है।
ऐसा करने से भोजन को अशुद्ध नहीं माना जाता।
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी
नुकीली या तेज वस्तुओं का प्रयोग न करें
घर से बाहर निकलने से बचें
पेट पर धारदार वस्तु न रखें
धार्मिक ग्रंथों का पाठ या मंत्र जाप करें_ ध्यान और साधना
ग्रहण का समय ध्यान, मौन साधना और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
इस दौरान मन की एकाग्रता अधिक होती है, इसलिए सकारात्मक संकल्प लेना लाभकारी माना जाता है।

जाने चंद्रग्रहण के बारे में__ शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का समय अच्छा नहीं होता है। जिसके कारण इस समय विशेष सावधानियां रखने की आवश्यकता होती है। कहा जाता है की चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बहुत अधिक हो जाता है। जिसके बचाव के लिए व्यक्ति को बहुत से उपाय भी करने होतें है। 03 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण (आंशिक से आंशिक तक) की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी।

दो तरह के होते हैं चन्द्रग्रहण __
सूर्यग्रहण एवं चन्द्रग्रहण भी मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं- खग्रास और खण्डग्रास। जब ग्रहण पूर्णरूपेण दृश्यमान होता है तो उसे “खग्रास” एवं जब ग्रहण कुछ मात्रा में दृश्यमान होता है तब उसे “खण्डग्रास” कहा जाता है।

ग्रहण के समय क्या करना चाहिए ?
ग्रहण के समय मंत्रों का जाप करने से किसी भी प्रकार के बुरे प्रभाव व्यक्ति को कष्ट नहीं पंहुचा पातें है। ठीक उसी प्रकार ग्रहण के प्रभावों को विफल करने के लिए ग्रहण के बाद दान करना भी बहुत उत्तम माना जाता है, इस बार का चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होने वाला, जिसके कारण इस दिन गुरु यानि भगवान विष्णु के सत्य स्वरुप की आराधना करना भी बहुत फलदायक होगा। बहुत से लोग इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ भी करतें है। साथ ही ब्राह्मण रुपी गुरु को भोज करवाया जाता है। कहा जाता है ब्राह्मण ईश्वर के सबसे निकट होता है जिसके कारण उन्हें कथा के पश्चात् भोज करवाने से बहुत ही उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

चंद्र ग्रहण के समय करें इन मंत्रों का जाप –
चंद्र ग्रहण दिखे या न दिखे लेकिन इसके कारण तमाम राशियों पर प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि यदि चंद्र ग्रहण वाले दिन चंद्रमा के मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः” अथवा भगवान शिव के मंत्र “ॐ नम: शिवाय” का जप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए। इससे अशुभ प्रभाव खत्म होते हैं।

कैसे लगता है चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण?
असल में यह एक खगोलीय घटना होती है। चंद्र ग्रहण उस खगो‍लीय घटना को कहा जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। वहीं, सूर्य ग्रहण तब माना जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता है।

चंद्र ग्रहण कैसे देख सकते हैं?
चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं होती है। चंद्र ग्रहण पूरी तरह से सुरक्षित होता है इसलिए आप इसे आंखों से देख सकते हैं। आप चाहें तो टेलिस्‍कोप की मदद से भी चंद्र ग्रहण देख सकते हैं।

जाने चंद्रग्रहण में क्या करें और क्या न करें –
ग्रहण के समय खाने पीने की मनाही होती है। कहा जाता है की इस दौरान खाना बनाना या खाना नहीं चाहिए। परन्तु यह नियम रोगी, बच्चों और बुजुर्गों पर लागु नहीं होता है।
ग्रहण के दौरान सोया भी नहीं जाता है। इस समय किसी भी व्यक्ति को निंद्रा नहीं लेनी चाहिए।
ग्रहण काल के समय पूजा – पाठ की मनाही होती है। इस कारण से इस समय पूजा की मूर्ति को छूना मना होता है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में अधिक ध्यान रखना होता है। इस कारण उन्हें ग्रहण के समय अपने पास एक नारियल आवश्य ही रखें चाहिए। ऐसा करने से ग्रहण के प्रभावों का असर बालक पर होने का भय समाप्त होता है।
ग्रहण काल में मन, शरीर एवं बुद्धि को सामान्य रखना चाहिए और किसी भी बुरे कार्य को करने का नहीं सोचना चाहिए।
ग्रहण काल में सभी के प्रति अच्छा व्यवहार रखना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को भूल के भी इस दौरान किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और सदैव एक – दूसरे के साथ मिल झूल के रहना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति ग्रहण काल में किसी को अपमानित करता है तो शनिदेव के नकारात्मक प्रभावों का भार उसे जीवन भर उठाना पड़ता है।
ग्रहण काल के समय सुनसान रास्तें पर नहीं जाना चाहिए।

चंद्र ग्रहण समाप्त होने पर करें ये काम __
चंद्र ग्रहण के दौरान निकलने वाली किरणों का इंसानों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में, ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए। यदि संभव को तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा जल भी मिला कर स्नान करें। ग्रहण की समाप्ति के बाद पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। साथ ही घर के पूजा स्थल के पास और उसके अंदर गंगा जल का छिड़काव अवश्य करें। इससे नकारात्मकता दूर होता है और घर शुद्ध हो जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिए गाय को रोटी खिलाएं। ग्रहण समाप्त होने के बाद कुछ दान अवश्य करें।

चंद्र ग्रहण का प्रभाव
जानें क्या होगा आपकी राशि पर प्रभाव_ चंद्र ग्रहण से इन राशियों को होगा फायदा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी ग्रह एक निश्चित अंतराल पर एक से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। ग्रहों के गोचर का प्रभाव सभी राशियों के जातकों और पूरी पृथ्वी पर पड़ता है। ग्रहों के राशि परिवर्तन के अलावा समय-समय पर चंद्र और सूर्य ग्रहण जैसे खगोलीय घटनाएं भी होती हैं। चंद्र ग्रहण का प्रभाव वैसे तो सभी राशियों के जातकों पर पड़ेगा लेकिन कुछ राशियां ऐसी होंगी जिनका भाग्य चमक सकता है। कौन-कौन सी राशियों को मिल सकता है लाभ।

मेष राशि (Aries) –
3 मार्च 2026 को होने वाला यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि में घटित होगा। मेष राशि के जातकों के लिए सिंह पंचम भाव में आता है, जो बुद्धि, संतान, प्रेम संबंध, रचनात्मकता और शिक्षा का भाव माना जाता है। इसलिए यह ग्रहण आपके जीवन के इन क्षेत्रों पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
सबसे पहले मानसिक स्थिति की बात करें तो इस समय भावनाओं में उतार-चढ़ाव संभव है। आप अचानक किसी निर्णय को लेकर असमंजस में पड़ सकते हैं। प्रेम संबंधों में गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए बातचीत में संयम और स्पष्टता बनाए रखना आवश्यक होगा। यदि आप किसी संबंध को लेकर गंभीर निर्णय लेना चाहते हैं, तो थोड़ा समय लेकर सोच-विचार करें।
विद्यार्थियों के लिए यह समय आत्ममंथन का हो सकता है। पढ़ाई में एकाग्रता थोड़ी प्रभावित हो सकती है, लेकिन यदि आप ध्यान और अनुशासन बनाए रखें तो लंबे समय में लाभ मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों को विशेष रूप से धैर्य रखने की आवश्यकता होगी।
संतान संबंधी मामलों में भी सतर्कता आवश्यक है। बच्चों की सेहत और पढ़ाई पर ध्यान दें। यदि आप संतान सुख की प्रतीक्षा में हैं, तो सकारात्मक सोच बनाए रखें।
आर्थिक दृष्टि से यह समय जोखिम भरे निवेश से बचने का संकेत देता है। शेयर बाजार या सट्टा जैसे कार्यों में सावधानी रखें। रचनात्मक कार्यों, कला, लेखन या मंचीय गतिविधियों से जुड़े लोगों को अचानक नई प्रेरणा मिल सकती है, लेकिन परिणाम धीरे-धीरे मिलेंगे।
स्वास्थ्य की दृष्टि से पेट और हृदय से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दें। क्रोध और आवेग को नियंत्रित रखें, क्योंकि चंद्र ग्रहण भावनात्मक असंतुलन ला सकता है।
उपाय के रूप में “ॐ चंद्राय नमः” का जाप करें, सोमवार को सफेद वस्त्र या चावल का दान करें, तथा ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करें।

वृषभ राशि (Taurus) –
वृषभ राशि के लिए चतुर्थ भाव में स्थित रहेगा। चतुर्थ भाव माता, घर-परिवार, संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति और आंतरिक सुख का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण मुख्यतः आपके घरेलू जीवन और मानसिक स्थिति पर प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में घर के वातावरण में कुछ अस्थिरता या मतभेद की स्थिति बन सकती है। परिवार के किसी सदस्य के साथ विचारों का टकराव संभव है, विशेषकर माता या वरिष्ठ महिला सदस्य के साथ। इसलिए वाणी पर नियंत्रण रखना और धैर्यपूर्वक संवाद करना आवश्यक होगा। पुराने पारिवारिक मुद्दे पुनः उभर सकते हैं, जिन्हें शांतिपूर्वक सुलझाने की आवश्यकता होगी।
मानसिक रूप से आप थोड़ा संवेदनशील महसूस कर सकते हैं। छोटी-छोटी बातों का प्रभाव अधिक पड़ सकता है। ऐसे समय में ध्यान, भजन या एकांत में समय बिताना आपके लिए लाभकारी रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी मन पूर्णतः केंद्रित नहीं हो पाएगा, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो जाएगी।
संपत्ति, भूमि या वाहन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचें। यदि कोई बड़ा निर्णय लेना हो तो ग्रहण के बाद लेना अधिक उचित रहेगा। निवेश करते समय सावधानी रखें।
स्वास्थ्य की दृष्टि से छाती, फेफड़े या मानसिक तनाव से संबंधित समस्याओं पर ध्यान दें। पर्याप्त नींद लें और अनावश्यक चिंतन से बचें।
सकारात्मक पक्ष यह है कि यह ग्रहण आपको आत्मविश्लेषण का अवसर देगा। आप अपने भीतर की वास्तविक आवश्यकताओं को समझ पाएंगे और जीवन में स्थिरता लाने के लिए नए संकल्प ले सकते हैं।
उपाय के रूप में सोमवार को दूध, चावल या सफेद वस्त्र का दान करें। “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जप करें और माता का सम्मान करें। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।

मिथुन राशि (Gemini) __ मिथुन राशि के लिए तृतीय भाव में पड़ेगा। तृतीय भाव साहस, संचार, पराक्रम, छोटे भाई-बहन, यात्रा और प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके निर्णय लेने की क्षमता, संवाद शैली और कार्यक्षेत्र में प्रयासों पर प्रभाव डाल सकता है।
इस समय आपकी वाणी और व्यवहार में थोड़ी तीक्ष्णता आ सकती है। अनजाने में कहे गए शब्द किसी के मन को आहत कर सकते हैं, इसलिए बोलने से पहले सोचने की आदत अपनाएँ। भाई-बहनों या सहकर्मियों के साथ मतभेद की संभावना बन सकती है। धैर्य और समझदारी से काम लें तो विवाद टल सकते हैं।
कार्यक्षेत्र में नए प्रोजेक्ट या योजनाएँ मन में आ सकती हैं, लेकिन तुरंत क्रियान्वयन की बजाय थोड़ी प्रतीक्षा करना बेहतर रहेगा। ग्रहण काल में लिए गए निर्णय भावनात्मक हो सकते हैं। छोटी यात्राओं की योजना बन सकती है, परंतु अनावश्यक यात्रा से बचना हितकर होगा।
मीडिया, लेखन, मार्केटिंग, संचार या तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय आत्ममंथन का हो सकता है। आपकी रचनात्मकता बढ़ेगी, परंतु परिणाम धीरे-धीरे मिलेंगे। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को नियमित अभ्यास जारी रखना चाहिए।
स्वास्थ्य की दृष्टि से कंधे, गला और तंत्रिका तंत्र पर ध्यान दें। अधिक सोच-विचार से मानसिक थकान हो सकती है। योग, प्राणायाम और ध्यान लाभकारी रहेंगे।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको अपनी संचार शैली सुधारने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर देगा। यदि आप संयम और संतुलन बनाए रखें तो भविष्य में लाभ प्राप्त होगा।
उपाय के रूप में “ॐ चंद्राय नमः” का 108 बार जप करें, सफेद वस्तुओं का दान करें और भाई-बहनों से मधुर संबंध बनाए रखें।

कर्क राशि (Cancer) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में लगने वाला चंद्र ग्रहण कर्क राशि के लिए द्वितीय भाव में घटित होगा। द्वितीय भाव धन, वाणी, परिवार, बचत और मूल्य प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके आर्थिक निर्णयों, पारिवारिक वातावरण और बोलचाल के तरीके पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
सबसे पहले धन संबंधी मामलों में सावधानी आवश्यक होगी। अचानक खर्च बढ़ सकते हैं या किसी पुराने आर्थिक विषय पर चर्चा हो सकती है। निवेश, उधार या बड़े लेन-देन से जुड़ा निर्णय ग्रहण के दौरान या उसके आसपास टालना बेहतर रहेगा। बचत की योजना पर पुनर्विचार करने का यह उपयुक्त समय हो सकता है।
वाणी में भावुकता बढ़ सकती है। आप संवेदनशील होकर प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जिससे पारिवारिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। इसलिए बोलने से पहले शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। परिवार में किसी पुराने मुद्दे पर चर्चा पुनः सामने आ सकती है, जिसे शांति और धैर्य से सुलझाना आवश्यक होगा।
कार्यक्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन मानसिक विचलन के कारण निर्णय लेने में असमंजस हो सकता है। इस समय जल्दबाजी से बचें और विश्वसनीय लोगों से सलाह लें। यदि आप पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े हैं तो पारदर्शिता बनाए रखें।
स्वास्थ्य की दृष्टि से गले, मुख या पाचन तंत्र पर ध्यान दें। अत्यधिक मीठा या तला-भुना भोजन कम करें। मानसिक शांति के लिए ध्यान और चंद्र मंत्र का जाप लाभकारी रहेगा।
सकारात्मक पक्ष यह है कि यह ग्रहण आपको अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने और आर्थिक अनुशासन विकसित करने का अवसर देगा। यदि आप संयम और विवेक से काम लेंगे तो भविष्य में स्थिरता प्राप्त होगी।
उपाय के रूप में “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जप करें, चावल या दूध का दान करें और परिवार में मधुरता बनाए रखने का संकल्प लें।

सिंह राशि (Leo) –
3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण आपकी ही राशि सिंह में घटित होगा। जब ग्रहण जन्म राशि में पड़ता है, तो उसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक गहरा और व्यक्तिगत माना जाता है। यह ग्रहण आपके प्रथम भाव में होगा, जो व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, स्वभाव और जीवन की दिशा से संबंधित है। इसलिए इस अवधि में आप स्वयं के भीतर महत्वपूर्ण बदलाव महसूस कर सकते हैं।
सबसे पहले मानसिक स्थिति की बात करें तो भावनात्मक उतार-चढ़ाव अधिक रह सकता है। छोटी बातों पर प्रतिक्रिया तीव्र हो सकती है। आत्मसम्मान को लेकर संवेदनशीलता बढ़ सकती है, इसलिए किसी की आलोचना को व्यक्तिगत रूप से न लें। संयम और धैर्य बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा।
स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता रखें। थकान, सिरदर्द, हृदय क्षेत्र या रक्तचाप से संबंधित परेशानी हो सकती है। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार का पालन करें। योग और प्राणायाम से लाभ मिलेगा।
कार्यक्षेत्र में अचानक निर्णय लेने से बचें। यदि आप नेतृत्व की भूमिका में हैं तो अधीनस्थों के साथ सौम्य व्यवहार रखें। यह समय आत्ममंथन का है—आप यह सोच सकते हैं कि आगे जीवन की दिशा क्या होनी चाहिए। नई शुरुआत करने की जल्दबाजी न करें; ग्रहण के बाद योजनाओं को अमल में लाना बेहतर रहेगा।
संबंधों में अहंकार टकराव का कारण बन सकता है। जीवनसाथी या निकट संबंधियों के साथ खुलकर और शांतिपूर्वक संवाद करें। प्रेम संबंधों में भावनात्मक स्पष्टता आवश्यक होगी।
सकारात्मक पक्ष यह है कि यह ग्रहण आपको आत्मपरिवर्तन और नई पहचान गढ़ने का अवसर देगा। यदि आप अपनी कमजोरियों को पहचानकर सुधार करेंगे तो दीर्घकाल में बड़ा लाभ मिलेगा।
उपाय के रूप में “ॐ चंद्राय नमः” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, सोमवार को सफेद वस्तुओं का दान करें और सूर्य-चंद्र संतुलन हेतु ध्यान करें।

कन्या राशि (Virgo) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में लगने वाला चंद्र ग्रहण कन्या राशि के लिए द्वादश भाव में घटित होगा। द्वादश भाव व्यय, विदेश, मानसिक अवचेतन, नींद, एकांत, आध्यात्म और गुप्त शत्रुओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके मनोभाव, खर्चों और आंतरिक चिंतन पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में मानसिक रूप से थोड़ी बेचैनी या अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। पुरानी बातें या दबे हुए भाव मन में उभर सकते हैं। नींद में कमी या अधिक स्वप्न आने की स्थिति बन सकती है। ऐसे समय में स्वयं को अधिक व्यस्त रखने के बजाय शांत वातावरण में समय बिताना लाभकारी रहेगा।
आर्थिक दृष्टि से अचानक खर्च सामने आ सकते हैं, विशेषकर स्वास्थ्य, यात्रा या किसी पारिवारिक कारण से। अनावश्यक खरीदारी से बचें और बजट बनाकर चलें। विदेश से जुड़े कार्यों, ऑनलाइन कार्य या दूरस्थ संपर्कों में कुछ हलचल हो सकती है।
कार्यक्षेत्र में पर्दे के पीछे की गतिविधियों पर ध्यान दें। कोई गोपनीय योजना या रणनीति बनाने का समय हो सकता है, लेकिन इसे सार्वजनिक करने में जल्दबाजी न करें। सहकर्मियों पर पूर्ण भरोसा करने से पहले परिस्थिति का मूल्यांकन करें।
स्वास्थ्य की दृष्टि से पैरों, नींद और मानसिक तनाव पर ध्यान दें। योग, ध्यान और प्राणायाम से मानसिक संतुलन बना रहेगा। यह समय आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको आत्मविश्लेषण और आंतरिक शुद्धि का अवसर देगा। यदि आप अपनी चिंताओं को पहचानकर समाधान खोजेंगे तो भविष्य में मानसिक शक्ति बढ़ेगी।
उपाय के रूप में “ॐ सोमाय नमः” का जप करें, जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र या चावल का दान करें और रात्रि में ध्यान करें। संयम और मौन आपके लिए इस ग्रहण में सबसे बड़ी शक्ति सिद्ध होंगे।

तुला राशि (Libra) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में होने वाला चंद्र ग्रहण तुला राशि के लिए एकादश भाव में पड़ेगा। एकादश भाव आय, लाभ, इच्छाओं की पूर्ति, मित्र मंडली, सामाजिक दायरा और बड़े लक्ष्यों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके सामाजिक संबंधों, नेटवर्किंग और भविष्य की योजनाओं पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में आप अपने मित्रों और सहयोगियों के व्यवहार को लेकर अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। किसी मित्र से मतभेद या दूरी की स्थिति बन सकती है। यह समय यह समझने का है कि कौन आपके सच्चे हितैषी हैं और कौन केवल औपचारिक संबंध निभा रहे हैं। भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ।
आर्थिक दृष्टि से अचानक लाभ या हानि दोनों की संभावना बन सकती है। शेयर बाजार, सट्टा या जोखिम भरे निवेश से बचना उचित रहेगा। यदि आप किसी बड़े प्रोजेक्ट या साझेदारी की योजना बना रहे हैं, तो अंतिम निर्णय ग्रहण के बाद लेना बेहतर होगा।
कार्यस्थल पर आपकी महत्वाकांक्षाएँ बढ़ सकती हैं। आप भविष्य को लेकर नई रणनीति बना सकते हैं, लेकिन धैर्य आवश्यक है। सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर भी मन में उतार-चढ़ाव रह सकता है। अपनी छवि सुधारने का प्रयास करें, परंतु दिखावे से बचें।
स्वास्थ्य की दृष्टि से रक्तचाप और मानसिक तनाव पर ध्यान दें। अत्यधिक सोच या तुलना करने से मन अशांत हो सकता है। ध्यान और प्राणायाम से संतुलन बनाए रखें।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों की समीक्षा करने और अनावश्यक संबंधों से दूरी बनाने का अवसर देगा। यह आत्ममंथन भविष्य में स्थायी सफलता की नींव रख सकता है।
उपाय के रूप में “ॐ चंद्राय नमः” का जप करें, जरूरतमंदों को दूध या चावल का दान करें और मित्रों के साथ मधुर व्यवहार बनाए रखें।

वृश्चिक राशि (Scorpio) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में होने वाला चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि के लिए दशम भाव में घटित होगा। दशम भाव कर्म, करियर, पद-प्रतिष्ठा, सामाजिक सम्मान और कार्यक्षेत्र की उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके पेशेवर जीवन और सार्वजनिक छवि पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में कार्यक्षेत्र में अचानक बदलाव या दबाव की स्थिति बन सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की संभावना रहेगी, इसलिए संयमित व्यवहार आवश्यक है। यदि आप किसी नए पद या जिम्मेदारी की अपेक्षा कर रहे हैं, तो थोड़ी देरी संभव है। भावनात्मक निर्णय लेने से बचें और किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले सावधानी बरतें।
व्यवसाय से जुड़े जातकों के लिए यह समय रणनीति की समीक्षा का है। बाजार की स्थिति या साझेदारी में कुछ परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। जोखिम भरे निवेश से बचें और दीर्घकालिक योजना पर ध्यान दें।
परिवार और कार्य के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। काम का तनाव घर के वातावरण को प्रभावित कर सकता है, इसलिए दोनों क्षेत्रों में संतुलन आवश्यक है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से हृदय, रीढ़ या रक्तचाप पर ध्यान दें। अत्यधिक तनाव लेने से बचें। नियमित व्यायाम और ध्यान लाभकारी रहेगा।
सकारात्मक पक्ष यह है कि यह ग्रहण आपको अपने करियर की दिशा पर पुनर्विचार करने और नई रणनीति बनाने का अवसर देगा। यदि आप धैर्य और विवेक से काम लेंगे, तो भविष्य में बड़ी उपलब्धि प्राप्त कर सकते हैं।
उपाय के रूप में “ॐ सोमाय नमः” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, सफेद वस्त्र या चांदी का दान करें और माता-पिता का आशीर्वाद लें। संयम और आत्मविश्वास इस समय आपकी सबसे बड़ी शक्ति होंगे।

धनु राशि (Sagittarius) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में होने वाला चंद्र ग्रहण धनु राशि के लिए नवम भाव में पड़ेगा। नवम भाव भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, गुरु, तीर्थ यात्रा, सिद्धांत और जीवन दर्शन का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके विश्वासों, आध्यात्मिक सोच और भविष्य की दिशा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में आपके विचारों में परिवर्तन संभव है। जिन सिद्धांतों को आप अब तक सही मानते आए हैं, उन पर पुनर्विचार करने की स्थिति बन सकती है। किसी गुरु, मार्गदर्शक या वरिष्ठ व्यक्ति के साथ मतभेद की संभावना भी बन सकती है। ऐसे समय में अहंकार से बचते हुए संवाद करना आवश्यक होगा।
उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह समय आत्ममंथन का रहेगा। पढ़ाई में थोड़ी बाधा या मन की अस्थिरता महसूस हो सकती है, लेकिन धैर्य और नियमित प्रयास से सफलता मिल सकती है। विदेश यात्रा या लंबी दूरी की यात्रा की योजना बन सकती है, परंतु ग्रहण काल में अंतिम निर्णय टालना उचित रहेगा।
भाग्य पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय कर्म पर ध्यान देना अधिक लाभकारी होगा। कानूनी मामलों या सरकारी कार्यों में थोड़ी देरी संभव है। संयम और नियमों का पालन करें।
स्वास्थ्य की दृष्टि से जांघों, कूल्हों और पाचन तंत्र पर ध्यान दें। मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए ध्यान और प्राणायाम करें।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको आध्यात्मिक उन्नति और आत्मचिंतन का अवसर देगा। आप अपने जीवन के उद्देश्य को नए दृष्टिकोण से समझ पाएंगे। यदि आप लचीलापन और विनम्रता बनाए रखेंगे तो भविष्य में लाभ होगा।
उपाय के रूप में “ॐ चंद्राय नमः” का जप करें, पीले या सफेद वस्त्र का दान करें और गुरुजनों का सम्मान करें। धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी लाभकारी रहेगा।

मकर राशि (Capricorn) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में लगने वाला चंद्र ग्रहण मकर राशि के लिए अष्टम भाव में घटित होगा। अष्टम भाव को ज्योतिष में परिवर्तन, गुप्त विषय, अचानक घटनाएँ, आयु, शोध, ऋण और साझा संपत्ति का भाव माना जाता है। इसलिए यह ग्रहण आपके जीवन में कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियाँ या आंतरिक परिवर्तन ला सकता है।
इस अवधि में मानसिक रूप से अस्थिरता या गहराई से सोचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। पुरानी चिंताएँ या दबे हुए भाव सामने आ सकते हैं। आप जीवन के गूढ़ पहलुओं पर अधिक विचार कर सकते हैं। यह आत्मविश्लेषण का समय है, लेकिन नकारात्मक सोच से बचना आवश्यक होगा।
आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी रखें। संयुक्त संपत्ति, बीमा, टैक्स, ऋण या निवेश से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखें। अचानक खर्च या वित्तीय दबाव संभव है। किसी भी प्रकार के जोखिम भरे निवेश से बचना बेहतर रहेगा।
संबंधों में भी गोपनीयता या संदेह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जीवनसाथी के साथ खुलकर संवाद करें और अनावश्यक शंका से दूर रहें। कार्यक्षेत्र में भी कोई अप्रत्याशित बदलाव या जिम्मेदारी आ सकती है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से गुप्त रोग, पेट या हार्मोन संबंधी समस्याओं पर ध्यान दें। नियमित स्वास्थ्य जांच कराना लाभकारी रहेगा। मानसिक शांति के लिए ध्यान और प्राणायाम करें।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको गहराई से आत्मपरिवर्तन का अवसर देगा। यदि आप धैर्य और संयम बनाए रखेंगे तो जीवन में नई शुरुआत की राह खुल सकती है।
उपाय के रूप में “ॐ सोमाय नमः” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, सफेद वस्तुओं का दान करें और जरूरतमंदों की सहायता करें। यह समय धैर्य, सावधानी और आध्यात्मिक अभ्यास का है।

कुंभ राशि (Aquarius) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि के लिए सप्तम भाव में घटित होगा। सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी, व्यावसायिक समझौते और सार्वजनिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके दांपत्य जीवन, प्रेम संबंधों और व्यापारिक साझेदारियों पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में संबंधों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ सकती है। जीवनसाथी या पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर मतभेद उभर सकते हैं। पुराने मुद्दे दोबारा चर्चा में आ सकते हैं। ऐसे समय में अहंकार को त्यागकर शांतिपूर्वक संवाद करना अत्यंत आवश्यक होगा। छोटी बातों को बढ़ाने से बचें।
यदि आप अविवाहित हैं तो किसी नए संबंध की शुरुआत को लेकर मन में असमंजस रह सकता है। निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। ग्रहण के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
व्यावसायिक दृष्टि से साझेदारी में पारदर्शिता रखें। किसी भी अनुबंध या समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। कानूनी मामलों में सावधानी बरतें। कार्यक्षेत्र में आपकी सार्वजनिक छवि पर भी प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए व्यवहार संतुलित रखें।
स्वास्थ्य की दृष्टि से गुर्दे, कमर और हार्मोन संतुलन पर ध्यान दें। मानसिक तनाव से बचने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन करने और उन्हें अधिक मजबूत बनाने का अवसर देगा। यदि आप संतुलन और समझदारी से काम लेंगे तो भविष्य में संबंध अधिक स्थिर और गहरे हो सकते हैं।
उपाय के रूप में “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का जप करें, सफेद वस्त्र या चावल का दान करें और जीवनसाथी के प्रति सम्मान व सहयोग की भावना रखें।

मीन राशि (Pisces) –
3 मार्च 2026 को सिंह राशि में लगने वाला चंद्र ग्रहण मीन राशि के लिए षष्ठम भाव में घटित होगा। षष्ठम भाव रोग, ऋण, शत्रु, दैनिक कार्य, सेवा और प्रतिस्पर्धा का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह ग्रहण आपके स्वास्थ्य, कार्यक्षेत्र की चुनौतियों और दैनिक दिनचर्या पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
इस अवधि में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें। छोटी समस्या को अनदेखा करना आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है। विशेषकर पाचन तंत्र, पेट, रक्तचाप या मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दें। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त विश्राम आवश्यक होगा।
कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। सहकर्मियों के साथ मतभेद या ईर्ष्या की स्थिति बन सकती है। अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित रखें और विवादों से दूर रहें। यदि आप नौकरी परिवर्तन का विचार कर रहे हैं, तो अंतिम निर्णय ग्रहण के बाद लेना अधिक उचित रहेगा।
ऋण या वित्तीय दायित्वों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इस समय आर्थिक अनुशासन अपनाना आवश्यक है। अनावश्यक खर्चों को सीमित करें और योजनाबद्ध ढंग से कार्य करें।
सकारात्मक रूप से यह ग्रहण आपको अपने जीवन की अव्यवस्थित दिनचर्या को सुधारने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने का अवसर देगा। यदि आप अनुशासन और संयम अपनाते हैं तो आने वाले समय में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
मानसिक शांति के लिए ध्यान, जप और आध्यात्मिक साधना करें। “ॐ सोमाय नमः” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप लाभकारी रहेगा। जरूरतमंदों को दवा, भोजन या सफेद वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है।
यह ग्रहण आपके लिए आत्मअनुशासन और आंतरिक शक्ति को मजबूत करने का संकेत देता है। धैर्य और नियमित प्रयास से आप चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं।

चंद्र ग्रहण के दौरान करें ये उपाय 03 मार्च को दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहने वाला है। इस दिन कौन से उपाय आपको लाभ दिला सकते हैं_चंद्र ग्रहण के उपाय –
चंद्र ग्रहण 03 मार्च, में किए जाने योग्य कुछ महत्वपूर्ण उपाय जो आर्थिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ देने वाले होंगे :

चंद्र ग्रहण 2026 में करने योग्य उपाय
आध्यात्मिक उपाय –
मंत्र जप –
“ॐ नमः शिवाय” या “ॐ चन्द्राय नमः” का जप करें।
ग्रहण काल में एक-एक मंत्र का जाप सामान्य समय से कई गुना फल देता है।
ध्यान और साधना –
ध्यान लगाने से मन शांत होगा और मानसिक तनाव दूर होगा।
कुंभ राशि का ग्रहण होने से आध्यात्मिक जागृति का योग प्रबल रहेगा।
आर्थिक लाभ के उपाय-
कुबेर मंत्र का जप –
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः” का जप ग्रहण के दौरान करें।
इससे धन वृद्धि और आर्थिक लाभ के मार्ग खुलते हैं।
चांदी का सिक्का/धन पर जल छिड़कना –
ग्रहण के दौरान गंगाजल में तुलसी डालकर रखें।
ग्रहण खत्म होने पर उस जल से अपने धन स्थान/तिजोरी पर छिड़कें।
लक्ष्मी पूजन बाद ग्रहण –
स्नान करके लक्ष्मी माता को कमल का फूल और धूप-दीप अर्पित करें।
“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र से 108 बार जप करें।
गृहस्थ जीवन और शांति के उपाय-
ग्रहण उपरांत स्नान और शुद्धि –
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल छिड़कें।
इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
दान पुण्य –
ग्रहण उपरांत गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, चावल, गुड़, दूध आदि का दान करें।
यह पापों का नाश और पुण्य लाभ दिलाता है।
पितृ तर्पण –
क्योंकि यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा पर है और इसके अगले दिन पितृपक्ष शुरू होंगे,
इसलिए पितरों का स्मरण और तर्पण विशेष शुभ होगा।
विशेष ध्यान रखें –
ग्रहण काल में किए गए साधारण से उपाय भी कई गुना फल देते हैं। इसलिए जप, दान और स्नान-शुद्धि को अवश्य अपनाएँ।