आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में आज महोत्सव एव वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन मनाया गया

परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्तोत्र उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में आज शनिवार दिनांक 09.08.25 को जैन धर्म के ग्यारवे तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का निर्वांण कल्याणक महोत्सव एव वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन मनाया गया।
आज प्रातः कालीन बेला में भगवान का अभिषेक शांतिधारा कर पूजन अर्चन किया गया भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री अशोक जैन केशव रोड को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात 700 मुनिराजों का अर्घ समर्पित किया गया एव भगवान श्रेयांशनाथ को निर्वांण लाडू समर्पित किय गया। मुख्य लाडू समर्पित करने का सौभाग्य श्री राजीव जैन भारत कंस्ट्रक्शन को प्राप्त हुआ।
सभी भक्तो ने पूज्य आचार्य श्री की पिक्चिका पर राखी बाधकर वात्सल्य पर्व मनाया।
पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि
जैन धर्म का यह सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, इस पर्व की शुरुआत एक अत्यंत प्राचीन घटना से है
इस तिथि को ७०० मुनियों का महा उपसर्ग (संकट) दूर हुआ था
७०० मुनियों ने उपसर्ग के काल में अपने धर्म साधना को नहीं छोड़ा, आत्म ध्यान में मग्न रहकर संकट से किंचित भी नहीं डरे।
विष्णुकुमार नाम के मुनि ने धार्मिक लोगों (साधर्मी) के प्रति वात्सल्य के कारण उपसर्ग दूर के धर्म की रक्षा की
साधर्मी और धर्म की रक्षा के कारण यह तिथि को रक्षा बंधन पर्व कहा जाता है, तभी से रक्षा बंधन पर्व मनाया जाता है धर्म के प्रति प्रेम और साधर्मी के प्रति वात्सल्य का यह पर्व है, केवल भाई बहन का त्यौहार नहीं है इस पर्व के दिन हम उन ७०० मुनिराज के धर्म के प्रति रुचि और प्रेम को स्मरण करे, हम विष्णुकुमार जी के साधर्मी वात्सल्य भावना को स्मरण करे
हम अपने देव शास्त्र और गुरु के ऊपर आने वाले संकट को दूर करने की भावना रखे, देव शास्त्र गुरु, जिनमंदिर, तीर्थक्षेत्र और समाज की रक्षा करे
धर्म को धारण करने वाले साधर्मी के प्रति वात्सल्य रखे उनकी रक्षा करे
साधर्मी के प्रति द्वेष, बैर, विरोध और बदले की भावना का त्याग करे, वात्सल्य भावना रखे_____याद रखे साधर्मी की रक्षा यह धर्म की रक्षा है___मधुसचिन जैन
मीडिया कोऑर्डिनेटर
देहरादून जैन समाज