संपादकीय _________मैं अनिरुद्धाचार्य महराज जी से कुछ विचारों को छोड़कर सम्पूर्ण रूप से सहमत हु ……..

भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है यहां कन्यापूजन से उसका एक बड़ा उदाहरण है परन्तु बदलते समाज से कही न कही हमारे संस्कार भी लुप्त होते जा रहे है जिसका सीधा प्रभार हमारी आने वाली नई पीढ़ी के जीवन पर पड़ रहा है जबकि महिला आज हर क्षेत्र में आगे है और अपने मान सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ
अब जरा अनिरुद्धाचार्य जी का यह वीडियो देखे _____ इस जरूर आपत्ति है वो इसलिए क्यूंकि समाज में कई नहीं हजारों लाखों मिल जाएंगे अब वो महिला हो या पुरुष जिनको विवाह से ही कोई लेना देना न हो वो ये 4 जगहों मुंह मरने का पाप तो नहीं करेंगे अगर किसी ने अपनी मर्याद को भूल कर ये पाप भी करता है तो उसको ये सजा के रूप में जीवन भर अपने सर पर रखकर चलना होगा हर इंसान सबसे झूठ बोलकर कुछ छुपा भी ले परन्तु आप अपने ईश्वर और अंतर आत्मा से कैस छुपा सकते हो _______ बात समाज में रहने की है तो समाज प्यार का भूखा होता है चाहे इंसान हो या जानवर उसको अपने माता पिता दादा दादी,परिवार रिश्तेदार अपने आसपास सब जगहों एक स्नेह और प्यार का वातावर्ण का माहौल जरूर चाहता हैं
समाज में लिविंग रिलेशनशिप एक अभिशाप आप इसको प्रयोगशाला कहसकते हो _____ इसका मतलब हीं है आपको बिना विवाह के विवाह के कर्म कांड करने है याद रखें जो लोग इस को सही मानते है या बढ़ावा दे रहे है उनका जीवन ही नर्क के समान है वो इस बात पर भी ध्यान दे आपको राम जैसे पुरुष और सीता जैसी नारी कभी नहीं मिलेगी
लिविंग रिलेशनशिप को कानूनी तौर पर अगर सही रखा गया है तो इसमें फंसे लोग कैसे अपने आप को बचा सकते है ______जबसे उत्तराखंड में ये लिविंग रिलेशनशिप कानून लागू किया गया है तबसे कई लोगो की आंखे तो जरुर खुली है परन्तु अब इसका फ़ायदा एक कहावत जरुर है ____जब चिड़ियां चुग गई खेत तो पछताने से क्या हुऐ रास्ते पैरों के नीचे ही होते है तय आपको करना है जाना कहा है गलत रास्ते पर गलत हीं होगा कभी सही नहीं हो सकता ____लिविंग में रह रहे लोग के लिए जरूरी सूचना अपने महिला हो या पुरुष जब भी इस लिविंग रिलेशनशिप को रजिस्ट्रेशन करने की बात करे उससे पहले अपने नजदीकी थाने में एक लिखित सूचना जरूर दे जिससे कि आपका पार्टनर आपको नर्कलोक न पहुंचादे क्योंकि आप गलत रास्ते पर है तो खतरा भी अधिक है सतर्क रहे लिविंग में रहने वाले इस्त्री या पुरुष कभी के साथ लायल नहीं रह सकते क्यूंकि उनको कपड़ों की तरह इंसान बदलने की आदत हो चुकी होती है
अब रही शारिरीक संबंध स्थापित करने की तो इसके लिए विवाह करने की प्रक्रिया तो बनीं ही है परन्तु अब देखा ये जा रहा है कि लोग विवाह से डरने लगे है और डरना भी स्वाभाविक है आज कल जिस तरह से समाज में देखने को मिल रहा है उस डर से अनेकों लोगों ने विवाह से इनकार करना हे उच्चित समझा है
संस्कृति और परंपरा: ______संस्कारी महिला अक्सर अपनी संस्कृति, परंपरा, और परिवार के मूल्यों को महत्व देती हैं। ये उनके व्यवहार, रीति-रिवाजों, और दैनिक जीवन में दिख जाता है ______व्यक्तिगत विचार और स्वतंत्रता: हर महिला के अपने विचार और स्वतंत्रता होती है। संस्कारी होने का मतलब जरूरी नहीं कि वो अपने विचारों को दबाए या सीमित रखे।______सामाजिक परिदृश्य: समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके संस्कार समय के साथ बदलते हैं। आजकल, महिलाएं कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं और अपने संस्कारों को लेकर भी जागरूक हैं।_____आज महिलाएं कई बड़े-बड़े मकाम हासिल कर चुकी हैं! वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और मेहनत का लोहा मनवा रही हैं। चाहे वो विज्ञान हो, खेल हो, राजनीति हो, या फिर व्यवसाय – महिलाएं हर जगह अपनी छाप छोड़ रही हैं। इस कारण भी कई महिला है जिन्होंने विवाह हीं नहीं किया इसलिए 25 साल के बाद मुंह मरने वाली बाथ से आपत्ति जरूर है
कपड़ों को लेकर भी जो महराज जी ने कहा ___उसका कुछ अलग हे मतलब निकल लिया जाता है जगहों को देखकर ही वस्त्रों का चयन करना उचित है आप नाइट सूट पहन कर आफिस तो नहीं जा सकते न बस अपनी सोच को सही समझाने का प्रयत्न करें बाकी सबकी इच्छा जो पहले आपको आजादी है परंतु स्थान को देखकर वस्त्रों को पहनना अत्यंत आवश्यक है आजकल मंदिर के साधु संत भी ये लिखने को मजबूर है मंदिर में मर्यादित वस्त्र पहन कर आए ऐसा क्यूं है कि हम कही भी जाते समय ये भूल जाते है कि हम मंदिर जा रहे है या पार्टी करने आप अपनी सोच से समाज को गन्दा करना बंद करे जो लोग फ्रीडम के नाम पर आए दिन अश्लीलता फैला रहे है
महिलाओं की उपलब्धियां______शिक्षा और करियर: महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर रही हैं।______खेल और खेलकूद: महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं और कई बड़े पुरस्कार जीत रही हैं।______राजनीति और नेतृत्व: महिलाएं राजनीतिक नेतृत्व में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और कई देशों में शीर्ष पदों पर आसीन हैं।_____उद्यमिता: महिला उद्यमी अपने व्यवसायों में सफलता प्राप्त कर रही हैं और आर्थिक विकास में योगदान दे रही हैं।
Live-in relationship को गांव में रखैल रखना बोलते थे। Live-in का हिंदी में मतलब ही रखैल होता है। रखैल को ही इंग्लिश में लिव इन या केप्ट बोलते है। ये कोई आज की परंपरा या कांसेप्ट नहीं है। बल्कि प्राचीन काल से दबंग, गुंडे और मवाली अपने लिए रखैल रखते आये है। इन औरतो का स्तर वैश्या से ऊपर का दर्ज़ा होता था। लेकिन सामाजिक और घरेलु महिला के दर्ज़े से निचे की हैसियत रखती थी। प्राचीन काल से रखैल की भारतीय समाज में कोई हैसियत नहीं होती थी। रखैल के बच्चे को पिता के रसूख के वजह से कभी कभी सम्मान मिल जाया करता था लेकिन संपत्ति में फिर भी कोई हिस्सा नहीं होता था। रखैल से मन भर जाने के बाद लोग लात मार के निकाल दिया करते थे। उनकी इतनी भी सामाजिक हैसियत नहीं होती थी की वे पंचायत बैठा सके। समाज के नियम तोड़ने के वजह से ऐसी महिलाओ से लोग बाग दुरी बना लेते थे।
आजकल रखैल बनाना कानूनन अपराध नहीं है। प्राचीन काल में भी रखैल रखना अपराध नहीं था। बस लोगो के नज़र में रखैल रखने वाले और रखैल बनने वाली वाली महिला की इज़्ज़त गिर जाती थी। लोग अपने बच्चो को ऐसे महिला या पुरुष से दूर ही रखते थे क्योकि उनका मानना था की इससे बिना मतलब समाज में असंतुलन पैदा होगा जिससे अपराध और अवैध सम्बन्ध बढ़ेंगे। आज भी रखैल बनने वाली महिला जब पुरुष से अन्य विवाहित महिलाओ की तरह सम्मान मांगती है। तब स्वयं रखैल रखने वाला पुरुष मना कर देता है। जिसके कारण आज भी लिव इन में रहने वाली महिलाये और पुरुष एक दूसरे की हत्या करते जा रहे है। पहले तो वामपंथी न्यायालय को लगा था की पुरुष और महिला में उसके और उसके बच्चे के लिए विवाहिक अधिकार के लिए उपजे संघर्ष को oppressor और oppressed में बाँट कर नारीवाद को एक नया आयाम देंगे लेकिन इस अधिकार के लिए होने वाली हत्याओ से खुद हाई कोर्ट परेशान हो गया है।
बॉलीवुड और टीवी सीरियल में रखैल बनने के तत्कालिक लाभ तो दिखाए जायेंगे लेकिन इससे होने वाले दुष्परिणाम पर न तो कभी याचिका आएगी और न तो कभी चर्चा होगी।
रखैल बने, ख़ुशी से बने लेकिन रखैल कहने पर बुरा मत माने क्योकि रखैल को इंगिलश में लिव इन कह देने से सामाजिक यथार्थ और सामाजिक सोच नहीं बदलती है। पोलिटिकल करेक्टनेस के लिए शराब को ड्रिंक न कहे। शराब को शराब ही कहे। रखैल को रखैल ही कहे। क्योकि यही सत्य है सत्य भाषा के बदलने से नहीं बदलता है। इसलिए जो सच है वो सच कहे। याद रखे। शब्दों को दूसरी भाषा में बोलने पे यथार्थ नहीं बदलता है।
Don’t become a door mat 🙏🏻🌿🕉️🔱🙏
