पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित कार्यशाला: पुलिस जवानों ने सीखा मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने और तनाव प्रबंधन का पाठ*

*पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित कार्यशाला: पुलिस जवानों ने सीखा मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने और तनाव प्रबंधन का पाठ*

पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित कार्यशाला: पुलिस जवानों ने सीखा मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने और तनाव प्रबंधन का पाठ*

देहरादून, 29 अक्टूबर 2026राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति, देहरादून द्वारा आज पुलिस लाइन में “सुसाइड प्रिवेंशन थ्रू युवा जोश (YUWA JOSH)” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस जवानों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट व आत्महत्या की प्रवृत्तियों पर चर्चा करना और उन्हें तनावमुक्त जीवन जीने के व्यावहारिक तरीके सिखाना था।कार्यशाला के दौरान देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा ने अपने वक्तव्य में तनाव और अवसाद से निपटने में परिवार तथा मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में अपनों का साथ और संवाद बहुत जरूरी है, क्योंकि मुश्किल समय में परिवार और मित्रों का संबल व्यक्ति को मानसिक अवसाद और संकट से उबरने में सबसे बड़ी मदद देता है।कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अपर प्रोफेसर और युवा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि पुलिस कर्मियों पर भारी जिम्मेदारी और लगातार कार्य का दबाव रहता है, ऐसे में उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करना और लचीलापन विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने पुलिस कांस्टेबलों को गुस्सा और भावनात्मक प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया तथा “बैलून थेरेपी” जैसी सरल तकनीकों के माध्यम से भावनाओं को संतुलित करने के तरीके समझाए।वहीं, एम्स ऋषिकेश की मनोवैज्ञानिक डॉ. ब्रुज़ाली अब्राहम ने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि आधुनिक जीवन की अपेक्षाएं युवा पीढ़ी को मानसिक रूप से अधिक संवेदनशील बना रही हैं, जिससे निपटने के लिए समय पर संवाद और परामर्श आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें पहचानना, अपनों से खुलकर बात करना और समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में सबसे अहम कदम हैं। सत्र के दौरान पुलिस जवानों ने बढ़- चढ़कर हिस्सा लिया और अपने अनुभव साझा किए। सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने प्रश्न पूछे और अपने अनुभव साझा किए।पुलिस लाइन सम्मेलन कक्ष में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, डॉ. संतोष कुमार, एडिशनल प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन, एम्स ऋषिकेश), श्री अंकित कंडारी (सी0ओ0)नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. ब्रूज़िली अब्राहम (AIIMS ऋषिकेश), श्री मुकेश त्यागी नारकोटिक्स इंस्पेक्टर, श्री शुभांश भट्ट एम०एण्ड०ई० ओ०, आई ई सी समन्वयक पूजन नेगी और एनसीडी अनुभाग से श्री प्रवीण खत्री प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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