टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया

टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग, केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर नियम समाप्त करने की अपील

टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया

देहरादून, 5 सितंबर 2026।टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के आह्वान पर देशभर के शिक्षकों ने आज शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आवाज बुलंद की।संघ का कहना है कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए। संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस संबंध में तत्काल अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत प्रदान की जाए तथा टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश त्यागी एवं राष्ट्रीय महामंत्री सुभाष चौहान की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि टीईटी की अनिवार्यता के विरोध एवं इसे समाप्त करने की मांग को लेकर संघ द्वारा चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया है। आंदोलन के प्रथम चरण में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया गया।इसी क्रम में राष्ट्रीय महामंत्री सुभाष चौहान ने रायपुर में शिक्षकों के बीच पहुंचकर उनके साथ काली पट्टी बांधी और शिक्षक दिवस को काला दिवस के रूप में मनाते हुए विरोध दर्ज कराया। वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार पाल ने डोईवाला तथा जगमोहन रावत ने नरेंद्र नगर में शिक्षकों के साथ आंदोलन में सहभागिता की।संघ के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने विभिन्न स्थानों पर काली पट्टी बांधकर सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी। शिक्षक नेताओं ने कहा कि लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करना उनकी प्रमुख मांग है और मांग पूरी होने तक आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।संघ पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि शिक्षकों की समस्या का शीघ्र समाधान करते हुए आवश्यक अध्यादेश लाया जाए, ताकि वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके

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