चातुर्मास की स्वर्णिम बेला पर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से परम पूज्या आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है

चातुर्मास की स्वर्णिम बेला पर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से परम पूज्या आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के सानिध्य में ससंघ गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में आने को धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें नित्य प्रतिदिन पूजन पाठ प्रवचन , माता जी की दिनचर्या में आहार , 3 बार सामयिक, भक्तों से मिलना, महिलाओं की धार्मिक कक्षा , बच्चों की पाठशाला , सायंकाल में गुरु भक्ति , तत्पश्चात महाआरती की जा रही है ।_______

चातुर्मास की स्वर्णिम बेला पर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से परम पूज्या आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है
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इसी कड़ी में मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि
कल दोपहर 3 बजे जैन धर्मशाला गांधी रोड पर हल्दी समारोह आयोजित किया जाएगा।________

आज नेमिकुमार, श्री कृष्ण, बालभद्र बिनोली यात्रा (स्वागत समारोह ) 1008 श्री पार्श्वनाथ पद्मावती तीर्थ धाम सोसाइटी क्लेमेंट टाउन में शाम को 5 बजे प्रारंभ होगी। 6:30 साक्षी इलेक्ट्रिकल से सेंट मैरी स्कूल होते हुए नासिक ढोल पार्टी द्वारा संगीतमय भजनों के साथ मंदिर परिसर में वापस पहुंची इस अवसर पर रास्ते में पड़ने वाले प्रतिष्ठानों और निवास कर रहे वाले भव्य जीवो द्वारा मंगल स्वागत भी किया गया।_______

माता जी ने कहा कि
णमोकार महामंत्र के शुद्ध उच्चारण से धर्मसभा का आरंभ करते हुए गुरुमाँ ने णमोकार मंत्र पढ़ने की तीन विधियाँ बताईं और साथ ही बताया कि अठारह हजार चार सौ बत्तीस तरीकों से नमोकार मंत्र पढ़ा जा सकता है। मंदिर में प्रवेश करने की विधि आदि का भी बहुत सुंदर वर्णन किया। खिले हुए फूल को मुरझाने से रोकने में कोई समर्थ नहीं है। उदित हुए सूर्य को अस्ताचल में जाने से रोकने के लिए कोई समर्थ नहीं है, लेकिन कर्म के उदय पर विजय पाने में सफलता मिल सकती है। जिन्होंने यह सफलता प्राप्त की, वे सब आज सिद्धालय में विराजमान हैं। एक ही लक्ष्य है—उदय पर विजय प्राप्त करो। उसके लिए पुरुषार्थ करना पड़ेगा।
भोग भोगने की चिंता में हम दुखी होते चले जा रहे हैं। संसार में दुःख भरा है, फिर भी उसी के पीछे भाग रहा है।______

अरे! तुझे संयोगों में मजा लगता है। ये मजा नहीं, सजा है। मेरा घर कहाँ है, यह पता नहीं; घर में क्या है, घर कैसा है, यह पता नहीं।______

जड़ घर के चिंतन की बात करें तो आँख बंद करके देखो, तो पूरा घर, घर की एक-एक चीज पहचानते हैं, लेकिन अपने चेतन का घर कभी दिखाई नहीं दिया।
इस अवसर पर भारी संख्या में जैन समाज के गणमान्य लोग अन्य समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।______मधु जैन
मीडिया समन्वयक
देहरादून जैन समाज

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