जैन धर्मशाला में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है

चातुर्मास की स्वर्णिम बेला पर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से परम पूज्या आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के सानिध्य में ससंघ गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में आने को धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है

जैन धर्मशाला में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है

जिसमें नित्य प्रतिदिन पूजन पाठ प्रवचन , माता जी की दिनचर्या में आहार , 3 बार सामयिक, भक्तों से मिलना, महिलाओं की धार्मिक कक्षा , बच्चों की पाठशाला , सायंकाल में गुरु भक्ति , तत्पश्चात महाआरती की जा रही है । आज *नेमिकुमार, श्री कृष्ण, बालभद्र बिनोली यात्रा (स्वागत समारोह )* में शाम 5 बजे वात्सलय भोजन शाम 6:30 बजे गुरु भक्ति (जैन भवन गाँधी रोड पर )*शाम 7:30 बजे जैन धर्मशाला (जैन कॉलोनी के गेट से आरम्भ )* की गई तत्पश्चात धामावाला (पतंगवाली गली साधु राम स्कूल के बराबर से )डिस्पेंसरी रोड, सरनीमल हाउस जैन मंदिर जी पर तिलक समारोह तत्पश्चात धामावाला,पीपल मंडी राजा रोड होते हुए गाजे बाजे के साथ भजनों पर थिरकते हुए वापस जैन भवन पहुंची। इसी कड़ी में मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि जैन समाज का एक प्रतिनिधिमंडल माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी से मिला और उनको श्री 105 पूर्णमति माताजी के 18 अगस्त को होने वाले दीक्षा दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया।*12 अगस्त को भगवान नेमिनाथ की भव्य बारात एवं नगर भ्रमण उन्होंने बताया कि 1008 श्री पार्श्वनाथ पद्मावती तीर्थ धाम सोसाइटी क्लेमेंट टाउन में शाम को 5 बजे प्रारंभ होगी। 6:30 साक्षी इलेक्ट्रिकल से सेंट मैरी स्कूल होते हुए मंदिर परिसर में वापस पहुंचेगी*इस अवसर पर रास्ते में पड़ने वाले प्रतिष्ठानों और निवास कर रहे वाले भव्य जीवो द्वारा मंगल स्वागत भी किया जाएगा।माता जी ने कहा कि जिनका वंदन करते-करते निज का वंदन हो जाता है, जिनके समीप जाकर आत्मा के समीप आ जाता है, भेद से अभेद में आ जाता है। ऐसे जिनेंद्र भगवान की भक्ति नियम से करनी चाहिए।भगवान का ध्यान करना नहीं आता, कैसे करें? उसमें उपयोग की एकाग्रता होनी चाहिए। सिनेमा देखने में कितनी एकाग्रता होती है, क्योंकि मन अधोगति की ओर, अशुभ की ओर तुरंत चला जाता है। मन रूपी जल को ऊर्ध्वगामी करने के लिए पुरुषार्थ करना होगा। माला फेरते रहते हैं, उपयोग इधर-उधर घूमता रहता है। ये भक्ति नहीं है, जाप भी नहीं है। सारे गृह-धंधे ध्यान में रख लो, कल्पनाओं में मगन हो, तो भक्ति कैसे हो सकती है?मेरा तो इस जगत में कुछ था ही नहीं। मैं तो आत्मा हूँ। जैसा था, वैसा ही हूँ और वैसा ही हमेशा रहूँगा। मेरे आत्मप्रदेशों में से कोई एक प्रदेश निकालकर ले जाए, ऐसी किसी में ताकत ही नहीं। लेकिन इस सत्य को न जानने के कारण बाहर की जोड़-तोड़ करते रहते हैं।इस अवसर पर भारी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। मधु जैन मीडिया समन्वयक देहरादून जैन समाज

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