रैवड़ियों की तरह पद बांट रही धामी सरकार, परिषदों की गरिमा से हो रहा खिलवाड़ :::::::महेश जोशी

रैवड़ियों की तरह पद बांट रही धामी सरकार, परिषदों की गरिमा से हो रहा खिलवाड़ : महेश जोशी

देहरादून______10 जून। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सचिव महेश जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार पर विभिन्न परिषदों और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद एवं युवा कल्याण परिषद जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में एक ही पद पर एकाधिक नियुक्तियां कर सरकार इन संस्थाओं की गरिमा और उद्देश्य को कमजोर कर रही है।जोशी ने कहा कि हाल ही में राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष पद पर तीन-तीन व्यक्तियों की नियुक्ति तथा युवा कल्याण परिषद में भी एक ही पद पर दो-दो व्यक्तियों को जिम्मेदारी देना यह दर्शाता है कि सरकार योग्यता और संस्थागत मर्यादा के बजाय राजनीतिक संतुलन साधने और अपने समर्थकों को खुश करने में लगी हुई है।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार स्वयं को पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक बताती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश में बढ़ते कर्ज, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार फिजूलखर्ची को बढ़ावा दे रही है। प्रदेश लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि सरकार अपने खर्चों में कटौती करने के बजाय नए-नए पद सृजित कर राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला चला रही है।महेश जोशी ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने समर्पित और वर्षों से संगठन के लिए कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रही है तथा अन्य दलों से आए लोगों को उपकृत करने में अधिक रुचि दिखा रही है। इससे भाजपा के भीतर असंतोष और अंतर्कलह की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिसे दबाने के लिए सरकार “रैवड़ियों की तरह पद बांटने” का काम कर रही है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में जब विभिन्न दायित्वों का वितरण किया जाता था, तब भाजपा उसे “लालबत्ती संस्कृति” और सत्ता का दुरुपयोग बताकर विरोध करती थी। लेकिन आज वही भाजपा सत्ता में रहते हुए राजनीतिक लाभ के लिए परिषदों और संस्थाओं को बांटने का कार्य कर रही है। यह दोहरा चरित्र जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है।जोशी ने सरकार से मांग की कि परिषदों और निगमों में नियुक्तियों के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी मानदंड तय किए जाएं तथा जनहित और संस्थागत गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब दिखावटी राजनीति नहीं, बल्कि जवाबदेह और जनोन्मुख शासन चाहती है।

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