देहरादून_______ “23 मई से खुलेगा आस्था का द्वार—हेमकुंड साहिब यात्रा को लेकर तैयारियां तेज, श्रद्धालुओं में उमड़ा उत्साह”

देहरादून_________ इस वर्ष विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई 2026 को श्रद्धालुओं के लिए विधिवत रूप से खोल दिए जाएंगे। इसके पूर्व 20 मई को पहले जत्थे को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रवाना किया जाएगा, जिसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
इसी क्रम में गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर यात्रा की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 20 मई को पहले जत्थे का भव्य विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सिख परंपरा के अनुसार पहले जत्थे का नेतृत्व ‘पंज प्यारों’ द्वारा किया जाएगा, जो इस पवित्र यात्रा की धार्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, ठहरने और मार्ग व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और ट्रस्ट मिलकर व्यापक स्तर पर कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा के सफल आयोजन के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के निर्देश भी दिए।
🌄 हेमकुंड साहिब की विशेषता
समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब हिमालय की गोद में बसे सबसे पवित्र सिख तीर्थस्थलों में से एक है। सात हिमाच्छादित पर्वतों से घिरे इस स्थल के मध्य स्थित पवित्र सरोवर इसकी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। मान्यता है कि दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां तपस्या की थी।
यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गोविंदघाट से लगभग 19 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो भक्ति, साहस और समर्पण का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है।
🙏 श्रद्धालुओं के लिए संदेश
हेमकुंड साहिब यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, प्रकृति के सान्निध्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं और इस दिव्य वातावरण में खुद को धन्य महसूस करते हैं।
