जय बद्री विशाल आस्था के सागर में डूबा बद्रीनाथ धाम – 6:15 बजे खुले कपाट, 15 हजार श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन🔱🌸🏵️🌼🌿🌟💥🚩🙏🏼

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जय बद्री विशाल! आस्था के सागर में डूबा बद्रीनाथ धाम – 6:15 बजे खुले कपाट, 15 हजार श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन”सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा कर मांगी देश-प्रदेश की समृद्धि | हरित और स्वच्छ चारधाम यात्रा का दिया संदेशउत्तराखंड के पवित्र धाम बद्रीनाथ में आज सुबह ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर भगवान बद्री विशाल के कपाट विधिविधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा धाम भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के अद्भुत संगम में डूब गया। मंदिर परिसर “जय बद्री विशाल” के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बद्रीनाथ और अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं की आस्था और उमंग देखते ही बन रही थी—हर चेहरा भक्ति में लीन और हर मन भगवान के चरणों में समर्पित नजर आया।प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस शुभ अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना कर कपाट उद्घाटन की गरिमा को और बढ़ाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा संपन्न कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।मुख्यमंत्री ने इस दौरान मंदिर परिसर स्थित लक्ष्मी मंदिर, गणेश मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी सहित अन्य देवस्थलों में भी विधिवत पूजा-अर्चना की।धाम में पहुंचे तीर्थयात्रियों का आत्मीय स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने यात्रा व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है।सीएम धामी ने देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं से “हरित एवं स्वच्छ चारधाम यात्रा” में सहयोग करने का आह्वान किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ ही बद्रीनाथ धाम में आस्था, परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यह आध्यात्मिक यात्रा न केवल श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभव है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी बनकर उभर रही है।

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