ब्रेकिंग हाई वोल्टेज न्यूज़____ अनिल चन्द रमोला
टिहरी। 07 मार्च 2026

यूजीसी विल के संशोधित नियमों के चलते पूरा सवर्ण समाज सड़कों पर उतरनें को पहुँच रहा दिल्ली_____यूजीसी के खिलाफ खामोश नेताओं अवाक् करेगी जनता___________
टिहरी-यूनिवर्सिटी ग्रांट्स आयोग (UGC) को लेकर जहाँ पूरे देश में बबाल है, वहीं यूजीसी कानून के खिलाफ राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर में देश के सवर्ण समाज की अगुवाई में महाआंदोलन की शुरुआत की जा रही है, बेशक सोशल मीडिया में पूर्व विधायक बृजभूषण सिंह, एडवोकेट अनिल मिश्रा, आरएन सिंह, रुमित ठाकुर, विष्णु शंकर जैन, शेर सिंह राणा, करणी सेना डॉ. राज शेखावत दिखते नजर आ रहे हैं, लेकिन देश का पूरा सवर्ण समाज सवर्ण समन्वय समिति के बैनर पर आज दिल्ली में हुंकार भरते नजर आयेगा।______बता दें कि यूजीसी सवर्ण समाज का गुस्सा संशोधित बिल 2026 के लाते ही अंदरखानें धीमी रफ्तार से चल रहा था, या यूँ कहें कि महाआंदोलन को सफल बनानें के लिए जमीनी तैयारी जोरों पर चल रही थी, जो नेता, अभिनेता, पूर्व/वर्तमान विधायक, सांसद, मंत्री, समाज चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता, संगठन, दल, पार्टी जो जागा वो यूजीसी बिल के विरोध की तरफ भागा, लेकिन अफसोस है कि अधिकांश सवर्ण समाज और उनके नेता, पूर्व/वर्तमान विधायक/सांसद सवर्ण समाज के लिए चुप्पी टिकट के लिए लुका छुपी करते सुनें जा रहे हैं, अपनें समाज बच्चों के भावी भविष्य के लिए जो आज भी मौन है, वह जनता का खेवनहार कभी नहीं हो सकता, ऐसे स्वार्थी नेताओं को नेतृत्व नहीं बल्कि पीछे कर देंनें की मांग उठनी शुरू हो गयी है।_________हमारी गढवाल रियासत का विलय भारत में इस आशा के साथ हुआ था ताकि गढ़वाल के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल बने, क्षेत्र में विकास और तरक्की हो लेकिन आजादी के बाद आज तक गढ़वाल का कितना विकास हुआ यह सभी जानते हैं। लेकिन वर्तमान में तो सरकारों द्वारा ऐसे काले कानून बनाए जाए रहें ताकि हमारे बच्चों को पढ़ने से ही रोका जा सके । शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार के असमानता पैदा करने वाले कानून कहाँ तक सच्ची हैं।________विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भारत सरकार का एक प्रमुख वैधानिक निकाय है, जो 1956 में स्थापित किया गया था, यह भारत में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को मान्यता प्रदान करता है, शिक्षा के मानक निर्धारित करता है और संस्थानों को अनुदान (फंड) देता है, इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है, यह कानून देश की आजादी के बाद 1956 से कार्य कर रहा था, मोदी सरकार के नेतृत्व मे 13 जनवरी 2026 को जारी नए यूजीसी विल के संशोधित नियमों के चलते पूरा सवर्ण समाज सड़कों पर उतरनें को दिल्ली पहुँच रहा है।______बता दें कि विरोध इसलिए हो रहा है कि यह बिल सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामलों और भेदभाव का डर पैदा करते हैं, सामान्य वर्ग में सवर्ण समाज का असंतोष इसलिए भी है कि ये नियम विशेष रूप से ओबीसी, एससी और एसटी को केंद्रित करते हैं, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को लक्ष्य बनानें का खतरा सता रहा है, देश का सवर्ण समाज एकजुट होकर इस बिल को लेकर सड़कों पर उतरनें का मन बना चुका है, देखना होगा कि सवर्ण समाज दिल्ली के जंतर मंतर पर अपनी एकजुटता को कितना मजबूत कर पाता है, और सरकार इस बिल को सवर्ण समाज के महाआंदोलन के बाद समाप्त करती है या बदलाव कर आती है, प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह नियम समानता लानें के बजाय शिक्षण संस्थानों में जातीय विभाजन को बढ़ावा दे सकता है।
