जैन मिलन महिला “एकता” एवं वीतराग विज्ञान पाठशाला के संयुक्त तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन धर्मशाला में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ वीतराग विज्ञान प्रतियोगिता–104 का भव्य आयोजन किया गया।


जैन मिलन महिला “एकता” एवं वीतराग विज्ञान पाठशाला के संयुक्त तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन धर्मशाला में सरक्षिका श्रीमती वीना जैन एवं संचालन अध्यक्ष श्रीमती वंदना जैन के निर्देशन में पाठशाला के बच्चों एवं वीरांगनाओं द्वारा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ वीतराग विज्ञान प्रतियोगिता–104 का भव्य आयोजन किया गया।


कार्यक्रम में पाठशाला के नन्हे-नन्हे बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। वहीं महिलाओं की सशक्त एवं प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने भी खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जैन समाज अध्यक्ष श्री विनोद कुमार जैन रहे। विशिष्ट अतिथियों में अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.के. जैन, कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर, श्री नरेश चंद जैन, श्री सुखमाल जैन, श्री सुनील जैन, श्री संजय जैन, श्री संदीप जैन, श्रीमती कुमकुम जैन एवं श्रीमती मधु जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. आर.के. जैन एवं श्री नरेश चंद जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में अनेक धार्मिक आयोजन होते हैं, किंतु जहां आत्मबोध, जीवन मूल्यों की समझ और आत्मज्ञान का अवसर मिलता है, वह वीतराग विज्ञान पाठशाला है। यह पाठशाला वर्ष 1990 से निरंतर संचालित है और अब तक अनेकों व्यक्ति यहां से शिक्षित होकर सफल एवं धर्ममय जीवन जी रहे हैं। यह ज्ञान परंपरा आज भी निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है।
मीडिया कोऑर्डिनेटर श्रीमती मधु जैन ने बताया कि संस्था की संरक्षिका श्रीमती वीना जैन, अध्यक्ष श्रीमती वंदना जैन एवं उनकी पूरी टीम जिस आपसी सहयोग, प्रेम एवं समर्पण भाव से कार्य करती है, वह अनुकरणीय है। सभी सदस्य घर से स्वयं भोजन बनाकर लाते हैं और स्नेह व सद्भावना के साथ सबको भोजन कराते हैं, जो समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देता है।
उल्लेखनीय है कि वीतराग विज्ञान पाठशाला वर्ष 1990 से श्रीमती वीना जैन के निर्देशन में निरंतर एवं सुचारू रूप से संचालित हो रही है। इसके अंतर्गत श्री दिगंबर जैन वीतराग विज्ञान विद्यापीठ परीक्षा बोर्ड, जयपुर द्वारा वीतराग विज्ञान पाठशाला भाग 1, 2, 3; बाल बोध पाठमाला भाग 1, 2, 3; जैन सिद्धांत प्रवेशिका के आठों भागों की परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। साथ ही मंगल विद्या पीठ परीक्षा बोर्ड द्वारा आचार्य नेमीचंद सिद्धांताचार्य रचित तत्त्वार्थ सूत्र, पंडित टोडरमल जी रचित मोक्षमार्ग प्रकाशक, पंडित दौलतराम जी रचित छहढाला तथा आचार्य कुंद-कुंद देव रचित समयसार, प्रवचनसार एवं नियमसार परमागम की कक्षाएं स्वाध्याय मंदिर एवं ऑनलाइन माध्यम से नियमित रूप से संचालित हो रही हैं।
ज्ञान गंगा की इस धारा में समाज की अनेक बहनें-भाइयों ने कंधे से कंधा मिलाकर धर्मलाभ प्राप्त किया है और आज भी उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। आतिथ्य सत्कार के अंतर्गत स्वयं अपने हाथों से भोजन तैयार कर वात्सल्य भोज आयोजित करना आपसी सद्भाव का अद्भुत उदाहरण है।
इस अवसर पर मंच पर सक्रिय सहभागिता निभाने वाली श्रीमती प्रीति जैन, सुनीता, अनुभव, संध्या, रश्मि, रचना, दीपशिखा, सीमा, अर्चना, नेहा, सुचिता एवं चारु शर्मा को विशेष रूप से साधुवाद दिया गया।
पंडित कैलाश चंद जी के सान्निध्य में योगेंद्र देवाचार्य रचित योगसार की 108 गाथाओं का अध्ययन प्रत्येक शनिवार को 25 मई 2024 से 24 जनवरी 2026 तक कुल 605 दिनों तक संपन्न हुआ। इसमें पुरुष वर्ग में सर्वाधिक उपस्थिति श्री नरेंद्र जैन की रही, जिन्होंने अनुशासन एवं निरंतरता का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं महिला वर्ग में सर्वाधिक उपस्थिति श्रीमती हीरा जैन (भिंड) की रही, जिनका जीवन जैन संस्कारों एवं पूजन-पाठ से ओत-प्रोत है।
इस अवसर पर नेहा जैन ज्योति जैन सुनीता जैन बबिता जैन रचना जैन मोनिका जैन मुनेंद्र स्वरूप डॉक्टर संजीव जैन आदि लोगों उपस्थित रहे