

देहरादून _______उत्तराखंड का लोकपर्व इगास बग्वाल बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इगास बग्वाल को बूढ़ी दीवाली के नाम से भी जाना जाता है, जो दीपावली के 11 दिन बाद मनाई जाती है। इस पर्व का महत्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और वीरता के प्रतीक के रूप में है।

इगास बग्वाल के अवसर पर उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच द्वारा शहीद स्मारक पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और उन्होंने एक-दूसरे को इगास बग्वाल की शुभकामनाएं दीं।


इगास बग्वाल की विशेषताएं:
- दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है: इगास बग्वाल को दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है, जो भगवान राम की अयोध्या वापसी की देरी से खबर पहुंचने के कारण मनाया जाता है।
- वीरता का प्रतीक: इगास बग्वाल वीर माधो सिंह भंडारी और उनकी सेना की वीरता का प्रतीक है, जिन्होंने तिब्बत पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी।
- सांस्कृतिक धरोहर: इगास बग्वाल उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जो पारंपरिक खेलों, लोकगीतों और सामूहिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
- भैलो खेलना: इगास बग्वाल के अवसर पर भैलो खेलने की परंपरा है, जो अंधेरे में उजाले का प्रतीक है।
इस अवसर पर उत्तराखंड वासियों को इगास बग्वाल की शुभकामनाएं देते हुए, हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए
