
उत्तराखंड व उतर प्रदेश में क्लस्टर विद्यालय खोले जाने का अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ घोर विरोध करता है________
उतर प्रदेश व उत्तराखंड में शासन व विभाग विकास खंड स्तर पर 1 से 12 तक क्लस्टर विद्यालय खोलने जा रही है,जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों में 10 किमी के दायरे में आने वाले विद्यालय मर्ज किए जायेंगें और मैदानी क्षेत्रों में 30 किमी के दायरे में आने वाले विद्यालय मर्ज कर क्लस्टर विद्यालयों में बच्चों का दाखिला किए जाने की कवायद सरकार चला रही है,जिस कारण ग्रामीण व मैदानी क्षेत्रों में हजारों हजार विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं।एक ओर आर टी ई के मानकानुसार सरकार की साफ मंशा थी कि प्रत्येक गांव व शहर में रहने वाले बच्चों को नजदीकी विद्यालयों में दाखिला दिलाकर शिक्षित किया जायेगा जिस कारण बच्चों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े,और बेरोज़गारी को कम करने के लिए प्रत्येक विद्यालयों में दो -दो भोजन माताओं की तैनाती भी की गई थी,यदि क्लस्टर विद्यालय खोले जाते हैं तो हजारों हजार भोजन माताओं का रोजगार भी समाप्त हो जायेगा और जो विद्यालय भवन ग्रामीण व शहरी स्तर में बनाएं गये थे वे खंडर में तब्दील हो जायेगें। अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष/प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उतर प्रदेश के अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि हम क्लस्टर विद्यालयों को कदापि स्वीकार नहीं करेगें त्यागी ने कहा कि हम जनता से पूछना चाहते हैं कि क्या आप अपने बच्चों को 10 से 30 किमी की दूरी पर पठन पाठन हेतु भेजने को राजी हैं। अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय महा मंत्री सुभाष चौहान ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षा पर नये नये प्रयोग कर रही है जिस कारण आज शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।चौहान ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आवागमन के लिए विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जिसमें नदी नाले ,जंगल आदि होते हैं यहां जंगली जानवरों का भी भय बना रहता है,हम सरकार से जानना चाहते हैं कि जो आपकी नीति है उसके अनुसार आप आने वाले बच्चों का भविष्य किस दिशा और दशा में ले जाना चाहते हैं , चौहान ने यह भी कहा कि पहले बेरोजगारी को कम करने के लिए गांव मोहल्ले में विद्यालय खोलकर रोजगार के अवसर दिए जाते थे और आज विद्यालयों को बंद करके रोजगार के अवसर समाप्त किए जा रहें हैं,इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार जनता को प्रलोभन देकर मझधार में रखना चाहती है और निजी विद्यालयों को आगे बढ़ाना चाहती है,जिसे गरीब बच्चे अनपढ़ रहकर आगे नहीं बढ़ पायेगें,एक समय था जब गांव मोहल्ले में विद्यालय हुआ करते थे प्रत्येक जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक सहित पांच अध्यापकों की तैनाती की जाती थी विद्यालय में छात्र संख्या अधिक हुआ करती थी,आज प्रत्येक जूनियर हाईस्कूलों में मात्र तीन अध्यापकों की तैनाती की जा रही है विषय अध्यापक नहीं हैं हिंदी संस्कृत विषय अध्यापक को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए वाद्य किया जा रहा है जिस कारण शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है और लोग पहाड़ों से पलायन करने के लिए मजबूर हो गये हैं।हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि यदि पहाडो़ में जनता नहीं रहेगी तो वोट मांगने किसके पास जावोगें ,और केन्द्र सरकार से वजट की मांग किसके लिए करेगें ये बहुत ही गंभीर मामला है,हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि एक बार विद्यालय मर्ज हो गये तो पुनः वापस नहीं हो सकते हैं, राज्य संगठनों से हम अपील करते हैं कि इस समय ठोस निर्णय लेकर क्लस्टर विद्यालयों का घोर विरोध किया जाए,ताकि हमारे विद्यालय बचे रहें। उत्तराखंड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से अपील है कि वर्तमान में त्रिस्तरीय कैडर व्यवस्था लागू करने की सरकार से मांग की जा रही है जो गतिमान है ,हमारा सुझाव है कि सभी जनपदों व विकास खंड के पदाधिकारियों को विश्वास में लेकर सुझाव आमंत्रित किए जाए,तभी जाकर त्रिस्तरीय कैडर व्यवस्था लागू करवाएं, जिसे शिक्षकों का हित भी सुरक्षित रहें और संगठन पर शिक्षकों का विश्वास बना रहें।संगठन 17140 प्रभावित शिक्षकों के मामले में ठोस निर्णय लेकर इस समस्या का जड़मूल समाधान करने की पहल करें । सुभाष चौहान ने कहा कि हम किसी भी दशा में क्लस्टर विद्यालयों को स्वीकार नहीं करेगें।यथा शीघ्र राष्ट्रीय स्तर पर एक बैठक आहूत की जायेगी और आगे की रणनीति तैयार कर शासन व प्रशासन की गलत नीतियों के विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
सुभाष चौहान
महा मंत्री
अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ।
